भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) की मांग: ‘वन नेशन वन एमएसपी’ नीति लागू करे सरकार,

मुज़फ्फरनगर के अम्बेडकर भवन में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग द्वारा रबी सीजन 2025-26 के मूल्य निर्धारण हेतु एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें देशभर के किसान प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस बैठक में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक सहित अन्य किसान संगठनों के नेताओं ने आयोग के समक्ष अपने सुझाव रखे। बैठक में सर्वसम्मति से यह मांग की गई कि रबी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सी2 लागत के आधार पर तय किया जाए। सी2 लागत में किसान की वास्तविक लागत, पारिवारिक श्रम, भूमि का किराया और पूंजी पर ब्याज शामिल होता है।किसान नेताओं का कहना है कि आज भी किसानों को उनकी फसलों की लागत से कम मूल्य मिलता है, जिससे उन्हें हर साल करीब 30,000 करोड़ रुपए का घाटा होता है। किसान यूनियन ने मांग की कि एमएसपी तय करते समय सफाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और परिवहन जैसी कटाई के बाद की लागतों को भी शामिल किया जाए। इसके साथ ही, किसान द्वारा उठाए गए जोखिम जैसे निर्यात प्रतिबंध या आयात से मूल्य में गिरावट को भी एमएसपी में समाहित किया जाए।संगठन नेवन नेशन वन एमएसपीनीति की मांग को दोहराया और कहा कि विभिन्न राज्यों में एक ही फसल के लिए अलगअलग एमएसपी किसानों के साथ अन्याय है। उदाहरण के लिए, गेहूं की खरीद पंजाब में 2425 रुपये, मध्य प्रदेश में 2600 रुपये और राजस्थान में 2575 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हुई, जबकि पूरे देश में एक समान मूल्य होना चाहिए। किसानों ने यह भी सुझाव दिया कि एमएसपी से वंचित फसलें और फलसब्जियां भी इसकी सूची में जोड़ी जाएं।किसान यूनियन ने एमएसपी और बाजार मूल्य में अंतर की भरपाई के लिए नकद सहायता की भी मांग की, ठीक उसी तरह जैसे अमेरिका में किसानों को मूल्य हानि पर प्रत्यक्ष भुगतान दिया जाता है। अंततः उन्होंने कहा कि एमएसपी गारंटी और निजी व्यापारियों की भागीदारी से किसानों के शोषण, आत्महत्याओं और कृषि संकट को रोका जा सकता है, जिससे टिकाऊ कृषि और खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

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