लावारिस शवों को देती हैं सम्मानजनक विदाई, महिला दिवस पर क्रांतिकारी शालू सैनी का भावुक सम्मान

मुजफ्फरनगर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर भोपा रोड स्थित SD Management College में आयोजित “मातृशक्ति का अभिनंदन” समारोह उस समय बेहद भावुक और गौरवपूर्ण बन गया, जब समाज सेवा की अनूठी मिसाल पेश करने वाली क्रांतिकारी शालू सैनी को मंच पर सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस मानवता का था जो आज भी समाज में जीवित है। महिला दिवस के अवसर पर एक अन्य कार्यक्रम रुड़की रोड स्थित Government ITI Muzaffarnagar में आयोजित किया गया, जिसका आयोजन प्रदेश के कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल द्वारा किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद गीता शाक्या उपस्थित रहीं।

समारोह में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली कई महिलाओं को सम्मानित किया गया, लेकिन जैसे ही मंच से क्रांतिकारी शालू सैनी का नाम पुकारा गया, पूरे सभागार में देर तक तालियों की गूंज सुनाई देती रही। शालू सैनी को यह सम्मान उनके उस अनोखे और मानवीय कार्य के लिए दिया गया, जिसे करने से अक्सर लोग कतराते हैं। वे उन लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करती हैं, जिनका इस दुनिया में कोई अपना नहीं होता। समाज में कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं, जब लोग अपनों के अंतिम संस्कार से भी पीछे हट जाते हैं, लेकिन शालू सैनी अनजान और लावारिस लोगों को भी सम्मान के साथ अंतिम विदाई देकर मानवता की अनूठी मिसाल पेश कर रही हैं।

जब उन्हें मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया तो सभागार में मौजूद कई लोगों की आंखें नम हो गईं। यह पल केवल सम्मान का नहीं बल्कि उस संवेदना का था, जो इंसानियत को जिंदा रखती है। सम्मान प्राप्त करते हुए शालू सैनी ने भावुक शब्दों में कहा कि उनके लिए हर लावारिस शव भी किसी की मां, किसी का बेटा, किसी का भाई या किसी की बेटी होता है। इसलिए उन्हें सम्मान के साथ अंतिम विदाई देना ही उनका कर्तव्य है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि गीता शाक्या ने कहा कि समाज को शालू सैनी जैसी बेटियों पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के समय में जहां लोग अपने स्वार्थ में उलझे रहते हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दूसरों के दुख को अपना समझकर सेवा का मार्ग चुनते हैं। राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने भी शालू सैनी के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल सेवा नहीं बल्कि सच्ची मानवता का उदाहरण है। कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और उपस्थित लोगों ने खड़े होकर तालियों के साथ शालू सैनी के कार्य को सम्मान दिया। महिला दिवस के अवसर पर दिया गया यह सम्मान समाज के लिए यह संदेश भी था कि इंसानियत आज भी जिंदा है।

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