बांदा।पैलानी तहसील अंतर्गत नली पलरा संपर्क मार्ग पर बीती रात केन नदी का जलस्तर बढ़ने से रपटा डूब गया। सुबह एसडीएम पैलानी अंकित वर्मा व नायब तहसीलदार पैलानी मोहम्मद मुस्तकीम ने पलरा नरी संपर्क मार्ग पर आए केन नदी के बाढ़ का पानी आने पर ग्रामीणों ने उपजिला अधिकारी पैलानी अंकित वर्मा को सूचना दिया मौके पर सुबह पहुंचे एसडीएम ने महज केन नदी के सामने फोटो खींच कर खाना पूर्ति कर ली।और नाव न लगाकर वापस पैलानी तहसील लौट आए। वही करीब 11रू00 बजे नायब तहसीलदार पैलानी मोहम्मद मुस्तकीम ने भी रपटे का निरीक्षण किया लेकिन नाव लगाने की जहमत तक नहीं उठा पाए। नरी पलरा संपर्क मार्ग पर पलरा कछार डेरा, बंसी डेरा, दुर्जन डेरा, पाई का डेरा आदि गांवों व मजरो के ग्रामीण व छात्र छात्राएं पैलानी आते हैं और छात्र-छात्राएं प्रतिदिन राजकीय इंटर कॉलेज पैलानी सुबह पढ़ने आते हैं वहीं बंसी डेरा की रहने वाली छात्राओं ने बताया कि अगर नाव नहीं लगी तो बड़ा हादसा हो सकता है वही ग्रामीणों ने जिलाधिकारी जे रीभा से रपटे पर र तत्काल नाव लगाए जाने को लेकर मांग की है।
लेखपालों के प्रदर्शन के चलते बाढ़ चौकियों में लटके रहे ताले – हापुड़ के डीएम द्वारा लेखपाल सुभाष मीणा पर दंडात्मक कार्रवाई करने के बाद आहत होकर मौत होने के के बाद पैलानी तहसील के ढाई दर्जन लेखपालों ने सुबह से ही तहसील में धरना प्रदर्शन देकर कार्य का बहिष्कार किया इसके चलते सत्रह बाढ चौकियों पर ताले लटके रहे। लेखपाल संघ अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि बाढ़ चौकियों में केवल लेखपाल और राजस्व निरीक्षक ही दिखाई दे रहे हैं बाढ़ चौकियों में ना तो पशुपालन विभाग ना स्वास्थ्य विभाग ना पंचायती राज विभाग समेत कई विभागों के कर्मचारी बाढ़ आपदा के समय बाढ चौकिया पर ना आकर लापरवाही बरत रहे हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार – वही बाढ़ जैसे आपदा में एसडीएम पैलानी द्वारा मीडिया से मुंह मोड़ने के बाद उनसे किसी भी प्रकार का वर्जन लेने पर सीधे तहसीलदार के ऊपर जिम्मेदारी सौंपने का बहाना बनाकर कन्नी काट रहे हैं। वहीं तहसीलदार राधेश्याम सिंह से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि बाढ़ चौकियों में कई ऐसे विभाग हैं जो लापरवाही बरत रहे हैं और बाढ चौकियों पर नही आ रहे हैं जिसको लेकर शीघ्र जिला अधिकारी को पत्र प्रेषित किया जाएगा।















