संसद के शीतकालीन सत्र में सोमवार को वंदे मातरम् को लेकर हुई चर्चा बेहद तीखी और राजनीतिक रूप से संवेदनशील रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पंडित जवाहरलाल नेहरू पर दिए गए बयान के बाद लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह वंदे मातरम् पर हो रही “महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक” चर्चा में हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी से पूछना चाहते हैं कि जब देश ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ चला रहा था, तब भाजपा के राजनीतिक पूर्वज कहां थे? इतिहास गवाह है कि उनके राजनीतिक विचारकों ने यह तक कहा था कि भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल नहीं होना चाहिए।
गोगोई ने कहा कि वंदे मातरम् ब्रिटिश शासन के खिलाफ रोष और डर पैदा करने का नारा था, जिसे आजादी के दीवानों ने अंग्रेजी हुकूमत के दिल में खौफ पैदा करने के लिए बुलंद किया। उन्होंने सवाल उठाया कि BJP-RSS के राजनीतिक पूर्वजों ने इस नारे की मूल मंशा—अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष—को कब पूरा किया? उन्होंने कभी ब्रिटिश शासन का वास्तविक विरोध किस रूप में किया? यह इतिहास बताने को तैयार नहीं है।
कांग्रेस नेता ने बताया कि साल 1937 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने निर्णय लिया था कि जहां भी राष्ट्रीय कार्यक्रम हों, वहां वंदे मातरम् की पंक्तियां गाई जाएंगी। इस फैसले का मुस्लिम लीग और हिंदू महासभा ने कड़ा विरोध किया और इसे राजनीति से जोड़कर कांग्रेस को निशाना बनाया। लेकिन कांग्रेस जनता के साथ खड़ी थी, न कि उन संगठनों के साथ जो समाज को विभाजित करने का काम कर रहे थे।
गोगोई ने साहित्य, कविता और गीतों की भूमिका का भी उल्लेख किया और कहा कि वंदे मातरम्, रवींद्रनाथ टैगोर की कविताएं, सरफरोशी की तमन्ना, इंकलाब जिंदाबाद, करो या मरो जैसे नारों ने करोड़ों देशभक्तों को अंग्रेजों के अत्याचार सहने की ताकत दी। उन्होंने बताया कि 1857 के विद्रोह के असफल होने के बाद पूरे देश में बेचैनी थी। ऐसे दौर में बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1872 में वंदे मातरम् की पहली दो पंक्तियां लिखीं, जो बाद में राष्ट्रगीत का आधार बनीं। इसके लगभग दस साल बाद उन्होंने आनंदमठ लिखा और उसमें गीत को पूर्ण रूप दिया।
उधर, प्रधानमंत्री मोदी ने चर्चा के दौरान कहा कि नेहरू ने अपनी लिखी चिट्ठियों में यह स्वीकार किया था कि आनंदमठ का बैकग्राउंड मुसलमानों को परेशान कर सकता है। उन्होंने बताया कि 1937 में मुस्लिम लीग ने वंदे मातरम् का विरोध बढ़ा दिया था और जिन्ना ने लखनऊ में इसके खिलाफ नारा लगाया। मोदी के अनुसार, जिन्ना की भावनाओं से प्रभावित होकर नेहरू ने वंदे मातरम् के उपयोग की जांच शुरू कराई और बाद में कांग्रेस ने इसे दो हिस्सों में बांटकर समझौता कर लिया।
पीएम मोदी ने इसे कांग्रेस की “माइनॉरिटी appeasement” की शुरुआत बताते हुए कहा कि कांग्रेस तब भी झुकी थी और आज भी वही नीति अपनाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस वंदे मातरम् के आसपास विवाद पैदा करती है और एक समय की राष्ट्रीय पार्टी अब “मुस्लिम लीग कांग्रेस” बनकर रह गई है।















