अलवर के राज ऋषि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय में 24 फरवरी को आयोजित फर्स्ट सेमेस्टर का कंप्यूटर का पेपर लीक हो गया। यह पेपर 400 से 500 रुपये में बेचा गया था। पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें तीन छात्र और दो कॉलेज संचालक के परिजन शामिल हैं।
एएसपी प्रियंका ने बताया कि परीक्षा से करीब एक घंटे पहले ही पेपर की पीडीएफ बाहर भेजी गई और इसे पैसों के बदले बेचा गया। इसके बाद यह पीडीएफ एक छात्र से दूसरे छात्र तक पहुंचती गई। चूंकि परीक्षा का समय दोपहर 12 बजे था और पेपर 11 बजे से पहले ही लीक हो गया, इसलिए इस पर संदेह पहले ही दिन से था। अब पुलिस की जांच में भी यह साफ हो गया है कि पेपर लीक हुआ था, जिसे दोबारा कराया जाएगा।
पुलिस जांच में यह सामने आया कि पेपर पीडीएफ के रूप में लीक हुआ, लेकिन यह किसने लीक किया, इसकी जांच जारी है। अभी तक तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जिन छात्रों के जरिए यह पेपर फैला, उन्हें गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में 3 मार्च को मुकदमा दर्ज किया गया था। गिरफ्तार छात्रों की पहचान मोहिता कुमार, जितेंद्र कुमार उर्फ मोनू यादव और सन्नी धानका के रूप में हुई है, जबकि गिरफ्तार अन्य दो आरोपियों में गजेंद्र सिंह यादव और रामनरेश उर्फ प्रमोद शामिल हैं।
इस मामले में विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेताओं ने एसओजी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अभी केवल छात्रों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि असली आरोपी विश्वविद्यालय के अंदर मौजूद हैं। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्षों का आरोप है कि पुलिस यूनिवर्सिटी स्टाफ को बचाने में लगी है, जबकि असल में पेपर लीक कराने वाला स्टाफ ही है। वे एसओजी जांच की मांग को लेकर जल्द ही बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं।















