बबेरू (बांदा)। तहसील बबेरू क्षेत्र के ग्राम भदेहदू के किसानों की परेशानी थमने का नाम नहीं ले रही। बीते पांच दिन से हो रही भारी बारिश के कारण दक्षिण हार के खेतों में बाढ़ का पानी भर गया है। यह पानी पहले ग्राम के मजरा परतू पुरवा होते हुए गोशाला और फिर लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाई गई क्रॉसिंग पुलियों से निकलता था, लेकिन इस वर्ष किए गए चौड़ीकरण के दौरान इन पुलियों को दबा दिया गया, जिससे जलनिकासी रुक गई। इसके साथ ही उत्तर दिशा की ओर बने नाले की चौड़ाई कम होने के कारण बाढ़ और बढ़ गई।
सैकड़ों चिंतित किसानों और ग्रामीणों ने इस संबंध में तहसील बबेरू पहुंचकर उपजिलाधिकारी को लिखित शिकायत दी, साथ ही ऑनलाइन माध्यम से भी शासन-प्रशासन को अवगत कराया। शिकायत में बताया गया कि हजारों बीघा खेतों में कमर तक पानी भर गया है, यहां तक कि मजरे और गांवों के घरों में भी पानी घुस गया है। जिला प्रशासन की ओर से हल्का लेखपाल अनिल सिंह और नायब तहसीलदार राहुल सिंह मौके पर केवल औपचारिकता निभाकर लौट आए, जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।
स्थिति बिगड़ती देख किसानों ने विधायक विशंभर सिंह यादव और सांसद कृष्णा देवी के प्रतिनिधि पूर्व मंत्री शिवशंकर सिंह पटेल से गुहार लगाई। दोनों जनप्रतिनिधि गांव तो पहुंचे लेकिन मात्र दो मिनट गाड़ी से उतरकर लौट गए। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने ओरन-बबेरू मार्ग जाम कर दिया।
सूचना पर पहुंचे समाजसेवी पीसी पटेल जनसेवक ने प्रशासन से संपर्क किया और आश्वासन मिलने पर दिनभर ग्रामीण प्रशासन का इंतजार करते रहे। रात 12 बजे के करीब तहसीलदार मनोहर सिंह, लेखपाल, नायब तहसीलदार, पुलिस बल और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। जेसीबी मशीन मंगवाकर खेतों में भरे पानी की निकासी को बंद करवा दिया गया ताकि गांव में पानी न घुसे।
प्रशासन ने आश्वासन दिया कि अगली सुबह लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाई गई पुलियों और नाले के चौड़ीकरण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई।
आज सुबह जब समाजसेवी पीसी पटेल किसानों के साथ खेतों पर पहुंचे तो खेतों की स्थिति देखकर वे भावुक हो गए। धान की पूरी फसल नष्ट हो चुकी थी। ऐसे में पीड़ित किसानों ने फैसला लिया कि जब भूख से मरना ही है, तो अपने खेतों में ही मरें। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि दो दिन में स्थलीय निरीक्षण कर नुकसान का आकलन और मुआवजे की व्यवस्था नहीं की गई तो वे परिवार सहित खेतों पर ही अनशन शुरू करेंगे।
इस मौके पर दर्जनों पीड़ित किसान और ग्रामीण मौजूद रहे। प्रशासन की निष्क्रियता और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से ग्रामीणों का भरोसा डगमगाने लगा है।















