मुजफ्फरनगर में स्मार्ट मीटर को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। भारतीय किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी शाह आलम ने इस मुद्दे पर बिजली विभाग और निजी कंपनियों को खुली चुनौती दे दी है। उन्होंने सार्वजनिक मंच पर डिबेट कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि विभाग और कंपनियां स्मार्ट मीटर के फायदे गिनाती हैं, तो वह इसके नुकसान और जमीनी हकीकत को सामने रखेंगे। उनका कहना है कि इस बहस से सच्चाई जनता के सामने आ जाएगी और यह तय हो जाएगा कि कौन सही है और कौन गलत।चौधरी शाह आलम ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लागू होने के बाद से किसानों और मजदूर वर्ग की परेशानियां बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि पहले जहां बिजली बिल एक निश्चित और समझ में आने वाली प्रणाली के तहत आता था, वहीं अब स्मार्ट मीटर के जरिए बिलों में अनियमितता देखने को मिल रही है। कई उपभोक्ताओं ने अधिक बिल आने, बिना खपत के भी चार्ज लगने और मीटर की रीडिंग में गड़बड़ी की शिकायतें की हैं। उनका दावा है कि ये समस्याएं सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बड़े स्तर पर आम जनता इससे प्रभावित हो रही है।उन्होंने यह भी कहा कि सरकार और बिजली विभाग स्मार्ट मीटर को पारदर्शिता और सुविधा के नाम पर लागू कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर उल्टा पड़ रहा है।
खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले किसान, जिनकी आय पहले ही सीमित है, उन्हें बढ़े हुए बिजली बिलों का बोझ उठाना पड़ रहा है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो रही है।चौधरी शाह आलम ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा बड़े स्तर पर आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि पहले चरण में प्रशासन से वार्ता की जाएगी, लेकिन यदि बात नहीं बनी तो धरना–प्रदर्शन और जनआंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने किसानों और मजदूरों से एकजुट रहने की अपील भी की।किसान नेता के इस बयान के बाद जिले में स्मार्ट मीटर को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर जहां बिजली विभाग स्मार्ट मीटर को आधुनिक और पारदर्शी व्यवस्था बता रहा है, वहीं दूसरी ओर किसान संगठनों का विरोध इसे एक बड़ा मुद्दा बना रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब इस पर सार्वजनिक बहस या आंदोलन की स्थिति बनती है।















