मालाखेड़ा में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को जोर-शोर से मनाया जाता है, लेकिन इसके बाद नारी शक्ति को उनके अधिकारों से वंचित कर दिया जाता है। पंचायती राज में महिलाओं को 33% आरक्षण देकर सशक्तिकरण का अवसर दिया गया है, ताकि वे विकास और नीति-निर्धारण में भागीदार बन सकें। हालांकि, गांव की सरकार बनाने के बाद महिलाओं को चुनकर भेज तो दिया जाता है, लेकिन उनके परिवारजन ही शासन चलाते हैं।

पंचायती राज व्यवस्था में महिलाएं वार्ड पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, प्रधान, जिला परिषद सदस्य और जिला प्रमुख जैसे पदों पर तो पहुंच जाती हैं, लेकिन कई बार वे पंचायत और जिला परिषद की बैठकों में खुद उपस्थित नहीं हो पातीं। उनके स्थान पर परिवार के पुरुष सदस्य बैठकों में शामिल होते हैं और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर हावी रहते हैं। अधिकारी भी इस स्थिति पर आंखें मूंदे रहते हैं, जिससे पुरुषों का मनोबल और अधिक बढ़ जाता है।
मालाखेड़ा पंचायत समिति की साधारण सभा में कई बार देखा गया है कि सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला पार्षद की बजाय उनके परिवारजन मौजूद रहते हैं और वाद-विवाद में शामिल होते हैं। इसके बावजूद उपखंड अधिकारी, तहसीलदार या विकास अधिकारी उन्हें रोकने का साहस नहीं दिखा पाते, जिससे पंचायती राज विभाग के नियमों का उल्लंघन होता है।
मालाखेड़ा पंचायत समिति क्षेत्र में 23 ग्राम पंचायतें हैं, जहां कई ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि स्वयं नहीं आते, बल्कि उनके परिवारजन मीटिंग में पहुंचकर अपनी हुकूमत चलाते हैं। यहां तक कि जिन पंचायतों में पुरुष जनप्रतिनिधि चुने गए हैं, वहां भी उनके पति या पुत्र आकर पंचायत के मामलों में हस्तक्षेप करते हैं।
प्रधान वीरवती ने स्पष्ट किया कि पंचायती राज में चुने गए महिला और पुरुष जनप्रतिनिधियों को ही बैठकों में भाग लेना चाहिए, न कि उनके परिवारजनों को। पूर्व सरपंच सुषमा ने कहा कि संविधान और लोकतंत्र में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है, लेकिन कई पुरुष इसमें हस्तक्षेप कर महिलाओं के अधिकारों को दबाने का प्रयास करते हैं। सरकार को इस पर सख्त कानून बनाकर ऐसे मामलों में कार्रवाई करनी चाहिए।
जमालपुर की सरपंच कुसमा चौधरी और ढाकपुरी की सरपंच सुनीता यादव ने भी कहा कि जब मतदाता महिलाओं को चुनते हैं, तो उन्हें पूरी तरह से भागीदारी निभाने का मौका मिलना चाहिए। बैठक में उनके अधिकारों का सम्मान होना चाहिए और उनके निर्णयों में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए।
तहसीलदार मेघा मीणा ने कहा कि नारी सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए पुरुषों को महिलाओं का सहयोग करना चाहिए और उन्हें प्रत्येक बैठक में उपस्थित होने का अवसर प्रदान करना चाहिए, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर विकास कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभा सकें।















