कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की अंतरराष्ट्रीय पहुंच को लेकर एक बार फिर सनसनीखेज खुलासे सामने आए हैं. अमेरिका के न्याय विभाग (DoJ) की ओर से जारी किए गए नए दस्तावेजों से पता चलता है कि एपस्टीन रूस के शीर्ष नेतृत्व तक सीधी पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा था.यहां तक कि वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से संपर्क स्थापित करना चाहता था. दस्तावेजों के अनुसार, एपस्टीन न्यूयॉर्क में रूस के तत्कालीन संयुक्त राष्ट्र राजदूत विटाली चुरकिन के संपर्क में था. चुरकिन की 2017 में अचानक मौत के बाद एपस्टीन ने नॉर्वे के राजनेता थोर्ब्योर्न यागलैंड के जरिए लावरोव तक पहुंचने की कोशिश की. जून 2018 के एक ईमेल में एपस्टीन ने यागलैंड से लिखा कि ‘चुरकिन मुझे समझते थे, उन्होंने ट्रंप को भी हमारे संवाद के बाद समझा था,’ और संकेत दिया कि रूस को ‘कुछ दिया जाना चाहिए ताकि वह बातचीत के लिए तैयार हो.’
क्या पुतिन-एपस्टीन की हुई मुलाकात?
दस्तावेज बताते हैं कि एपस्टीन ने 2013 से 2018 के बीच कई बार पुतिन से मिलने या बात करने की कोशिश की. उसने दावा किया कि वह रूस को पश्चिमी निवेश आकर्षित करने के तरीकों पर सलाह दे सकता है. एक ईमेल में उसने यहां तक लिखा कि अगर पुतिन उनसे मिलना चाहते हैं, तो उन्हें ‘कम से कम दो से तीन घंटे का निजी समय’ देना होगा. हालांकि, किसी भी दस्तावेज से यह पुष्टि नहीं होती कि पुतिन और एपस्टीन की कभी मुलाकात हुई हो.
क्या रूस का एजेंट था जेफ्री एपस्टीन?
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक इन खुलासों के बाद यूरोप में चिंता बढ़ गई है. पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने ऐलान किया है कि उनका देश एपस्टीन के संभावित रूसी खुफिया संबंधों की जांच शुरू करेगा. टस्क ने आशंका जताई कि यह पूरा नेटवर्क रूसी खुफिया एजेंसियों की ओर से संचालित या इस्तेमाल किया गया हो सकता है. हालांकि, क्रेमलिन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. रूसी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि एपस्टीन को रूसी खुफिया एजेंट बताने की थ्योरी ‘गंभीरता से लेने लायक नहीं’ है.
FSB से जुड़े लोगों से नजदीकी
दस्तावेजों में यह भी सामने आया है कि एपस्टीन ने खुद को रूस की खुफिया एजेंसी एफएसबी से जुड़े अधिकारियों का ‘करीबी दोस्त’ बताया. उसने रूसी आर्थिक मंचों, निवेश सम्मेलनों और अरबपतियों तक पहुंच बनाने में भूमिका निभाने का दावा किया. एक ईमेल में उसने रूसी अधिकारियों से अमेरिका में कथित ब्लैकमेल की घटनाओं पर ‘सलाह’ भी मांगी थी, जिससे उसकी गतिविधियों की गंभीरता और बढ़ जाती है. 2015 के एक लेटर में, एपस्टीन ने एक शख्स को लिखा कि मॉस्को की एक रूसी लड़की न्यूयॉर्क में ‘ताकतवर’ बिजनेसमैन के एक ग्रुप को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रही थी और ‘यह इसमें शामिल सभी लोगों के लिए बिजनेस के लिए बुरा है.’ इसके बाद एपस्टीन ने बताया कि वह महिला न्यूयॉर्क कब आई और वह किस होटल में ठहरी थी, और पूछा, ‘कोई सुझाव?’
विश्लेषकों का मानना है कि दस्तावेज यह साबित नहीं करते कि एपस्टीन रूसी जासूस था, लेकिन यह जरूर दिखाते हैं कि वह खुद को एक ‘जियो-पॉलिटिकल फिक्सर’ के रूप में पेश कर रहा था, जो दुनिया की बड़ी ताकतों के बीच सौदे करा सकता है.















