अमेरिका की ओर से ईरान पर अब तक के सबसे कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की चेतावनी के बीच ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबाफ ने इराक के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने का आह्वान किया है।उन्होंने शुक्रवार को बगदाद में ईरानी और इराकी कारोबारी प्रतिनिधियों से कहा कि दोनों देश अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में कारोबार कर अमेरिकी डालर पर निर्भरता कम कर सकते हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, गलीबाफ ने कहा कि ईरान और इराक को अमेरिका की ओर से लगाए जाने वाले अन्यायपूर्ण प्रतिबंधों से निपटने के लिए योजना बनानी होगी।उन्होंने कहा कि आज राष्ट्रीय मुद्राओं में कारोबार करना संभव है और इससे डॉलर पर निर्भरता कम की जा सकती है। उनके मुताबिक, क्षेत्र में सुरक्षा और आर्थिक विकास एक-दूसरे से जुड़े हैं और केवल सुरक्षा कायम करने से स्थायी स्थिरता नहीं आएगी, जब तक उसके साथ आर्थिक गतिविधियां न बढ़ें।
ईरानी संसद अध्यक्ष ने अमेरिका और इजरायल पर ईरान और इराक के खिलाफ आर्थिक और मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया।उन्होंने कहा कि दोनों देशों को आर्थिक मोर्चे पर भी उसी तरह तैयारी करनी होगी, जिस तरह वे सुरक्षा के मोर्चे पर करते हैं। गलीबाफ ने साथ ही कहा कि ईरान युद्ध का पक्षधर नहीं है, लेकिन वह अपनी संप्रभुता और सम्मान की रक्षा करेगा।
सोमवार को सामने आएगा अमेरिकी प्रतिबंधों का खाका
एएनआई के अनुसार, गलीबाफ का यह बयान अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की उस चेतावनी के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने ईरान पर इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने की बात कही थी।बेसेंट ने कहा है कि इन उपायों का विस्तृत खाका सोमवार को सामने रखा जाएगा। उनका कहना है कि अमेरिका ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए व्यापक अभियान चलाएगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी ईरान को वित्तीय और कारोबारी मदद देने वाले देशों को गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। अमेरिकी दबाव का निशाना ईरान के तेल कारोबार, वित्तीय लेनदेन, मुद्रा विनिमय केंद्रों, जहाज पंजीकरण और कथित मुखौटा कंपनियों जैसे आर्थिक तंत्र हो सकते हैं।
बेसेंट ने चीन से भी अमेरिकी प्रयासों में सहयोग करने को कहा है। चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और दोनों देशों के बीच व्यापार पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में है।
बेसेंट ने कहा कि चीन के लिए भी फारस की खाड़ी से ऊर्जा आपूर्ति बाधित होना नुकसानदेह है।
चीन ने हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों और दबाव की नीति को समाधान मानने से इनकार किया है और कहा है कि मौजूदा संकट का हल कूटनीति के जरिए निकाला जाना चाहिए।
इसके बावजूद ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी का असर दिख रहा है। चीन को ईरानी तेल निर्यात में 80 प्रतिशत तक की कमी आई है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ती जा रही हैं।























































