मुजफ्फरनगर। जनपद में एक किसान ने ईमानदारी, सामाजिक जिम्मेदारी और नागरिक कर्तव्य का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसकी हर ओर सराहना हो रही है। ग्राम टिटोडा, तहसील खतौली निवासी किसान विक्रम सिंह पुत्र वेदराम ने स्वेच्छा से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ छोड़ते हुए प्राप्त राशि जिला प्रशासन को वापस सौंप दी। उनके इस सराहनीय कदम की जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने खुले दिल से प्रशंसा करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।
जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान विक्रम सिंह स्वयं पहुंचे और उन्होंने प्रशासन को बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में वह इस योजना के लाभ के पात्र नहीं हैं अथवा उन्हें इसकी उतनी आवश्यकता नहीं है, जितनी किसी अन्य जरूरतमंद किसान परिवार को हो सकती है। इसी भावना के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि वापस करते हुए योजना का लाभ त्यागने का निर्णय लिया। किसान के इस कदम ने वहां मौजूद अधिकारियों और आम लोगों को भी प्रभावित किया।
जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने कहा कि विक्रम सिंह द्वारा उठाया गया यह कदम केवल एक सरकारी योजना का लाभ छोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाने का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी जरूरतों का सही आकलन कर दूसरों के अधिकार और हितों के बारे में सोचता है, तब वह समाज में सकारात्मक बदलाव की नींव रखता है। ऐसे नागरिकों के कारण ही सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में उन लोगों तक पहुंच पाता है, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता होती है।
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जिलाधिकारी ने विक्रम सिंह की ईमानदारी, पारदर्शिता और संवेदनशील सोच की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि उनका यह निर्णय अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि समाज के सक्षम लोग भी इसी प्रकार की जिम्मेदारी का परिचय देते हुए जरूरतमंदों के अधिकारों की रक्षा में सहयोग करेंगे।विक्रम सिंह के इस कदम की क्षेत्र में व्यापक चर्चा हो रही है। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने भी उनकी सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में जब अधिकांश लोग सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का प्रयास करते हैं, तब किसी व्यक्ति द्वारा स्वेच्छा से लाभ छोड़ना और राशि वापस करना वास्तव में प्रशंसनीय है। किसान की यह पहल न केवल ईमानदारी की मिसाल बनी है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि समाज के प्रति जिम्मेदारी और नैतिकता आज भी जीवित है।























































