मालाखेड़ा (अलवर) – जल जीवन मिशन के तहत ढाकपुरी गांव के लिए 147 लाख रुपये की योजना स्वीकृत हुई थी, लेकिन दो साल बीत जाने के बावजूद गांव के कई हिस्सों में पाइपलाइन नहीं बिछाई गई। हालात यह हैं कि 85 वर्षीय गंगा लहरी सेन और उनकी 80 वर्षीय पत्नी भौती देवी आधा किलोमीटर दूर खेतों से सिर पर पानी लाने को मजबूर हैं।

गांव में जल जीवन मिशन योजना के तहत 200 किलोलीटर का सीडब्ल्यूआर टैंक, तीन ट्यूबवेल और 10.033 किलोमीटर पाइपलाइन डालने का प्रावधान था। योजना का कार्य 23 अप्रैल 2022 को शुरू हुआ और इसे 22 अक्टूबर 2022 तक पूरा होना था, लेकिन अब तक आबादी क्षेत्र में राइजिंग लाइन और कनेक्शन लाइन नहीं डाली गई है।
गांव के गड्ढभीतला, ब्राह्मण, दलित सेन सहित कई मोहल्लों में अब तक जल जीवन मिशन के तहत कनेक्शन नहीं हुए हैं। कई घरों में नल लगाए तो गए, लेकिन पानी की सप्लाई अब तक शुरू नहीं हुई, जिससे ये नल शोपीस बनकर रह गए हैं। गांव के लोग निजी ट्यूबवेलों से पानी भरने को मजबूर हैं, जबकि जल जीवन मिशन के तहत बने दो ट्यूबवेल में से एक ढाकपुरी और दूसरा पीलाढाबा में काम कर रहा है। तीसरे ट्यूबवेल का स्टार्टर और अन्य उपकरण जले हुए हैं, जिन्हें अब तक बदला नहीं गया है।
गांव के फूल सिंह, कमल सिंह, बनवारी लाल, लालचंद, मुरली भगोर, कैलाश बेरवा, मुकेश बैरवा, संतोष देवी, पप्पू, मूर्ति देवी और सोना देवी ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत उनके घरों में कनेक्शन तो लगे हैं, लेकिन अब तक पानी की सप्लाई नहीं हुई। वहीं, करीब 150 घरों में 600 से अधिक की आबादी तक पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन ही नहीं डाली गई।
गांव में लगे सिंगल फेज के ट्यूबवेल भी कई महीनों से खराब पड़े हैं, लेकिन अब तक उनकी मरम्मत नहीं कराई गई। सहायक अभियंता हितेश कुमार का कहना है कि गांव में राइजिंग लाइन बिछाने के लिए रिवाइज्ड एस्टीमेट बनाया गया है, जिसकी स्वीकृति मिलते ही काम शुरू किया जाएगा। फिलहाल ग्राम पंचायत ने योजना को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है, जिसके कारण ट्यूबवेल के जले हुए स्टार्टर और उपकरण बदले नहीं गए हैं।
गर्मी का मौसम शुरू होते ही गांव में पानी की किल्लत और बढ़ गई है, लेकिन प्रशासन और संबंधित विभाग की लापरवाही के चलते ग्रामीणों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।















