बांदा के अतर्रा क्षेत्र के गुमाई ग्राम में चल रही भागवत महापुराण कथा के चौथे दिन रविवार को कथा व्यास ने गणेश वंदना और देव गुरुओं को नमन करते हुए कथा की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि भगवान कृष्ण, जो सोलह कलाओं से संपन्न हैं, पृथ्वी और देवताओं की प्रार्थना पर भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी की मध्यरात्रि में कारागार में प्रकट हुए। कंस के बंदीगृह में जन्म लेने के बावजूद, यह महोत्सव युगों से प्रतीक्षित भक्तों के लिए अपार आनंद का क्षण था।
कथा के दौरान बताया गया कि मथुरा के नर-नारी, पशु-पक्षी, लता-वृक्ष सभी जन्मों से इस शुभ अवसर की प्रतीक्षा कर रहे थे। जैसे ही भगवान का जन्म हुआ, पूरे ब्रह्मांड में हर्ष की लहर दौड़ गई। यह जन्मोत्सव भक्तों के लिए जीवन को धन्य करने वाला अवसर होता है। कथा व्यास ने कहा कि आज के समय में जो भी इस अमृतमयी कथा का रसपान करता है, वह सौभाग्यशाली होता है।
भागवत कथा के दौरान श्रद्धालु भजनों पर झूम उठे। इस आयोजन में सैकड़ों भक्त उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से बच्चू लाल यादव, सावित्री देवी यादव, अशोक कुमार यादव, मोहन द्विवेदी, गोपाल द्विवेदी, पंडित सोहन, पंडित विश्वनाथ प्रसाद मिश्रा, पुजारी रेवा गौतम, गंभीर रामभजन, ओमप्रकाश गौतम, राम किशोर गौतम, दादू गौतम, पंडित संजय शुक्ला, मनोज कुमार पाण्डेय, गोमती देवी मिश्रा, सुखदेव मिश्रा, सेतू मिश्रा, परी, गुड़िया, ममता, आशा रानी, पप्पू गौतम, संगीता, सीता, पोलो, निर्मला शुक्ला, कुंती देवी, शरमन देवी, तुलसा द्विवेदी, रानी, सुनीता, रश्मि प्रभा, शशि, रजनी, सरोज, वंदना, रामवती और सीमा सहित कई श्रद्धालु शामिल हुए। जयकारों के साथ भक्तों ने आनंदपूर्वक कथा का रसास्वादन किया।















