दिल्ली-एनसीआर में सुबह घने कोहरे ने हवाई यातायात की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दृश्यता बेहद कम होने के कारण उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ और सुरक्षा कारणों से 118 उड़ानें रद करनी पड़ीं, जबकि 16 उड़ानों को अन्य हवाई अड्डों की ओर डायवर्ट किया गया। कोहरे की तीव्रता इतनी अधिक थी कि रनवे पर विजिबिलिटी कई बार शून्य के करीब पहुंच गई, जिससे टेकऑफ और लैंडिंग में दिक्कतें आईं। सुबह के समय सबसे ज्यादा असर देखा गया, जब बड़ी संख्या में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें निर्धारित समय पर उड़ान नहीं भर सकीं।
कई यात्रियों को घंटों एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ा, वहीं कुछ यात्रियों की कनेक्टिंग फ्लाइट्स भी छूट गईं। एयरलाइंस ने यात्रियों को एसएमएस और ईमेल के जरिए उड़ानों की स्थिति की जानकारी देने की कोशिश की, लेकिन अचानक हुए बदलावों के कारण अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार, कैट-थ्री तकनीक से लैस विमानों को ही सीमित रूप से संचालन की अनुमति दी गई, जबकि अन्य उड़ानों को रद या डायवर्ट करना पड़ा। डायवर्ट की गई उड़ानों को जयपुर, लखनऊ, अमृतसर और चंडीगढ़ जैसे नजदीकी हवाई अड्डों पर उतारा गया, जहां यात्रियों के ठहरने और आगे की यात्रा के लिए वैकल्पिक इंतजाम किए गए। मौसम विभाग ने बताया कि उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और ठंडी हवाओं के चलते अगले कुछ दिनों तक कोहरे की स्थिति बनी रह सकती है, जिससे हवाई यातायात पर असर जारी रहने की आशंका है। प्रशासन और एयरपोर्ट प्रबंधन ने यात्रियों से अपील की है कि वे एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले अपनी फ्लाइट की स्थिति की जांच कर लें और अतिरिक्त समय लेकर यात्रा करें। उधर, हवाई सेवाओं के बाधित होने का असर सड़क और रेल यातायात पर भी दिखा, क्योंकि कई यात्रियों ने वैकल्पिक साधनों का सहारा लिया। कुल मिलाकर, घने कोहरे ने एक बार फिर राजधानी के हवाई यातायात तंत्र की चुनौतियों को उजागर कर दिया और यात्रियों के लिए सफर को बेहद कठिन बना दिया।















