मुजफ्फरनगर। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार से गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि देश का युवा सड़कों पर आंदोलन करने के लिए मजबूर इसलिए है क्योंकि उसे अपने भविष्य की चिंता सता रही है। लाखों छात्र-छात्राएं वर्षों तक कठिन परिश्रम कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और उनके परिवार अपनी मेहनत की कमाई उनकी शिक्षा पर खर्च करते हैं, लेकिन जब परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो जाता है या भर्ती प्रक्रिया विवादों में घिर जाती है तो केवल एक परीक्षा ही नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं के सपने भी टूट जाते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राज्यों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्तियों पर पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, जिससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हुए हैं। धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि यदि छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करते हैं तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी बात सुनी जानी चाहिए, न कि उन पर लाठीचार्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की मजबूती विरोध को दबाने में नहीं, बल्कि संवाद स्थापित कर समाधान निकालने में होती है।
उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा कि केवल मंत्री बदलने से व्यवस्था नहीं बदलती, बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, जवाबदेही तय करने और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने विपक्ष को भी जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि छात्रों की समस्याओं को केवल राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है, बल्कि सभी दलों को मिलकर परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। धर्मेंद्र मलिक ने सरकार से चार प्रमुख सवालों के जवाब मांगे हैं, जिनमें राष्ट्रीय स्तर पर पेपर लीक रोकने की स्थायी व्यवस्था, संगठित गिरोहों और उनके संरक्षणकर्ताओं पर कठोर कार्रवाई, परीक्षा रद्द होने पर छात्रों के समय, धन और मानसिक क्षति की भरपाई की नीति तथा भर्ती एवं परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की समयबद्ध योजना शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत तभी मजबूत और विकसित राष्ट्र बनेगा जब उसके युवाओं का भविष्य सुरक्षित होगा। अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री से छात्र प्रतिनिधियों के साथ तत्काल संवाद स्थापित करने, पेपर लीक के दोषियों पर बिना किसी राजनीतिक संरक्षण के सख्त कार्रवाई करने और ऐसी शिक्षा एवं परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की जिस पर देश का प्रत्येक छात्र भरोसा कर सके।























































