दिल्ली होटल अग्निकांड: बीमार पिता से मिलने आया था एक झटके में बुझ गईं 8 जिंदगियां

बुधवार की सुबह दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में होटल में लगी आग में 21 लोगों की मौत हो गई. मरने वालों में गुरुग्राम के एक ही परिवार के 8 लोग भी शामिल हैं. साउथ दिल्ली के मालवीय नगर इलाके के हौज रानी में बने फ्लोरिश स्टे बेड एंड ब्रेकफास्ट होटल में पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक अग्रवाल का परिवार भी यहां रुका हुआ था.

बुधवार की सुबह-सुबह जिस वक्त इस होटल में आग भड़क गई, तब यह परिवार वहां नाश्ता कर रहा था. यहां ठहरे परिवार के सभी 8 सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई. इस घटना के बाद सेक्टर 46 में विवेक के घर में सन्नाटा पसरा है और आसपड़ोस में रहने वाले लोग भी शोक में हैं.

विवेक अग्रवाल का परिवार दिल्ली से सटे गुरुग्राम के सेक्टर 46 में ही रहता था. विवेक के 80 वर्षीय पिता इन दिनों मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती हैं. पूरा परिवार उनसे ही मिलने के लिए यहां आया था और हॉस्पिटल के पास मौजूद इस होटल में ही ठहर गया. विवेक के साथ उनकी पत्नी तर्जनी अग्रवाल, दो बेटियां जिविशा और वर्या और 4 अन्य रिश्तेदार भी यहां साथ थे. विवेक ने इस होटल में 2 कमरे बुक किए थे.

इस दुर्घटना में अचानक ही यह परिवार तबाह हो गया है. इन 8 लोगों की मौत के बाद विवेक के परिवार में अब सिर्फ उनके 80 वर्षीय पिता राधे श्याम अग्रवाल ही जीवित बचे हैं, जो मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती हैं. परिवार में हुए इस हादसे की खबर सुनकर उनके रिश्तेदार भी सदमे में हैं. हादसे में परिवार के 8 सदस्यों की मौत की बात सुनकर उनके रिश्तेदार उनके मृत शरीर को लेने पहुंचे थे लेकिन अथॉरिटीज ने उन्हें बताया कि जब तक डीएनए सैंपल का मिलान नहीं हो जाता, तब उन्हें बॉडीज नहीं मिल पाएंगी.

मालवीय नगर में बने इस 5 मंजिला होटल में सुबह करीब 8.30 बजे अचानक आग भड़क गई. यह आग चंद मिनटों में बेकाबू हो गई और इसने पूरे होटल को अपनी चपेट में ले लिया. इस हादसे में कुल 21 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 12 विदेशी नागरिक हैं, जबकि दर्जनों अन्य लोग घायल हैं, जिनका इलाज चल रहा है. जिस वक्त यह हादसा हुआ, तब इस होटल में करीब 40 लोग मौजूद थे, जिनमें से ज्यादातर लोग उस वक्त सोए हुए थे.

दिल्ली पुलिस ने बताया, इस होटल में सिर्फ एक ही एंट्री और एग्जिट गेट था. होटल की खिड़की पर्मानेंटली सील की हुई थी, जबकि होटल का मुख्य दरवाजा सेंसर ऑपरेटेड था. ऐसे में यहां फंस लोगों के पास बाहर निकलने के सीमित विकल्प ही बचे थे. ज्यादातर लोगों ने खिड़कियों से बाहर कूदकर अपनी जान बचाई.

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