नई दिल्ली में आयोजित CBI के राष्ट्रीय सम्मेलन “Tackling Cyber-Enabled Frauds & Dismantling the Ecosystem” को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने तकनीक-आधारित पुलिसिंग और एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने CBI की नई Cyber Crime Branch का औपचारिक शुभारंभ किया, जो जटिल साइबर अपराधों, अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन फ्रॉड, डिजिटल मनी ट्रेल की ट्रैकिंग तथा संगठित साइबर नेटवर्क को फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर ध्वस्त करने पर केंद्रित होगी। साथ ही I4C के State Support to States (S4C) डैशबोर्ड को भी लॉन्च किया गया, जो राज्यों को रियल-टाइम जानकारी, तकनीकी संसाधन और समन्वय का साझा मंच प्रदान करेगा।
अमित शाह ने डिजिटल इंडिया के 11 वर्षों की उपलब्धियां गिनाते हुए बताया कि 2014 में जहां लगभग 25 करोड़ इंटरनेट यूजर्स थे, आज यह संख्या 100 करोड़ से अधिक हो चुकी है। ब्रॉडबैंड कनेक्शन में कई गुना वृद्धि हुई है और मोबाइल डेटा की कीमतों में लगभग 97 प्रतिशत तक कमी आई है। भारतनेट के माध्यम से इंटरनेट कनेक्टिविटी गांवों तक पहुंची है, जिससे सरकारी सेवाएं सीधे नागरिकों तक तेज और पारदर्शी तरीके से पहुंच रही हैं। वर्ष 2024 में 181 बिलियन से अधिक डिजिटल लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य लगभग 233 ट्रिलियन रुपये रहा, जिससे भारत वैश्विक डिजिटल भुगतान में अग्रणी बन चुका है।
हालांकि बढ़ती डिजिटल गतिविधियों के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़े हैं। देश में औसतन हर 37 सेकंड में एक व्यक्ति साइबर अपराध का शिकार बन रहा है और अब तक लगभग 20,000 करोड़ रुपये की ठगी हो चुकी है। त्वरित कार्रवाई के जरिए 8,189 करोड़ रुपये फ्रीज या वापस कराए गए हैं। 1930 साइबर हेल्पलाइन को और प्रभावी बनाने, म्यूल अकाउंट हंटर सॉफ्टवेयर को सभी बैंकों में लागू करने तथा संदिग्ध सिम और मोबाइल पर कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए। दिसंबर 2025 तक 12 लाख से अधिक सिम रद्द, 3 लाख IMEI ब्लॉक और 20,853 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। सरकार का लक्ष्य I4C को राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित कर सभी बैंकों और संस्थानों को इससे जोड़ना है, ताकि डेटा-आधारित रणनीति और तेज प्रतिक्रिया से साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।















