बांग्लादेश में नई सरकार के गठन के साथ ही सेना प्रमुख वकार-उज-जमान की कुर्सी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इस स्थिति के पीछे दो बड़ी वजहें मानी जा रही हैं। पहली वजह यह है कि वकार-उज-जमान के धुर विरोधी खलीलुर रहमान को तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार में मंत्री पद दिया गया है, जिससे सत्ता और सेना के बीच समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं। दूसरी वजह बांग्लादेश की पुरानी राजनीतिक परंपरा है, जिसके तहत नई सरकार बनने के बाद अक्सर सेना प्रमुख को बदला जाता रहा है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बार भी सेना में बड़ा बदलाव हो सकता है। गौरतलब है कि वर्ष 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने वकार-उज-जमान को सेना प्रमुख नियुक्त किया था। वकार उनके रिश्तेदार भी बताए जाते हैं। हालांकि सत्ता परिवर्तन के दौरान उन्होंने खुलकर शेख हसीना का साथ नहीं दिया था, जिसके बाद से उनकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। नई सरकार के गठन के बाद अब उनकी स्थिति पर सबकी नजर टिकी हुई है।
पहले जानिए कौन हैं वकार उज जमान?
59 साल के वकार उज जमान 2024 में बांग्लादेश के सेना प्रमुख बनाए गए. वकार 19 साल की उम्र में बांग्लादेश की सेना में शामिल हो गए. शुरुआत में उन्हें यूएन मिशन पर तैनात किया गया था. 2013 में शेख हसीना की पहल पर उन्हें मेजर जनरल के पद पर प्रमोट किया गया. वकार इसके बाद सेना के चीफ ऑपरेशन स्टाफ बनाए गए.हसीना की सरकार में वकार की तूती बोलती थी. हसीना के जाने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हुआ. इस दौरान वकार और अंतरिम सरकार के बीच कई बार टकराव की स्थिति बनी, लेकिन जनमत न होने की वजह से वकार हर बार सरकार पर भारी पड़े, लेकिन अब वकार की कुर्सी संकट में आई गई है
पहली वजह- खलीलुर वर्सेज वकार जमान
तारिक रहमान ने वकार के धुर-विरोधी खलीलुर रहमान को अपनी सरकार में विदेश मंत्री नियुक्त किया है. खलीलुर यूनुस सरकार में रक्षा मामलों के मंत्री थे. यूनुस सरकार के दौरान कई मौकों पर वकार और खलीलुर के बीच शीतयुद्ध देखने को मिला, लेकिन तब खलीलुर ज्यादा कुछ नहीं कर पाए. क्योंकि जनसमर्थन उनके पास नहीं था. अब चुनी हुई सरकार में मंत्री होने की वजह से खलीलुर पावरफुल हो गए हैं.बांग्लादेश में वर्तमान में चीफ ऑपरेशन स्टाफ का पद रिक्त है. खलीलुर इस पद पर 24वीं इन्फैंट्री डिविजन के जीओसी मेजर मीर मुशफिकुर रहमान को नियुक्त करना चाहते हैं. सेना में यह दूसरा सबसे बड़ा पद माना जाता है. वहीं वकार जमान इस पद पर अपने करीबी मैनउर रहमान को नियुक्त करना चाहते हैं.
दूसरी वजह- सेना को लेकर पुरानी परंपरा
1996 में शेख हसीना की सरकार बांग्लादेश में आई. उस वक्त अबू सालेह नसीम सेना प्रमुख थे. हसीना ने उन्हें हटाकर महबुबर रहमान को सेना प्रमुख नियुक्त किया. इसी तरह अक्तूबर 2001 में खालिदा जिया बांग्लादेश की प्रधानमंत्री नियुक्त हुईं. खालिदा ने कुछ ही महीने बाद तत्कालीन सेना प्रमुख हारून रसीद की छुट्टी कर दी.2008 में जब शेख हसीना ने फिर से सत्ता में वापसी की, तो तत्कालीन मोईन उद्दीन अहमद को हटाया गया. ऐसे में अब चर्चा वकार जमान को लेकर है. जमान नई सरकार के लिए किसी भी तरह से भरोसेमंद नहीं हैं. क्योंकि आवामी लीग ने उन पर अमेरिका से मिले होने का आरोप लगाया था.























































