बकरीद से ठीक पहले गोहत्या विरोधी कानूनों के सख्ती से अमल की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका सामने आई. हालांकि इस याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया. चीफ जस्टिस सूर्यकांत (CJI Surya Kant) की अगुवाई वाली बेंच ने मामले की तत्काल सुनवाई से साफ इनकार कर दिया.दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका का जिक्र करते हुए वकील ने कहा कि परसों बकरीद है और ऐसे में गौहत्या विरोधी कानून को लागू कराने की मांग वाली याचिका पर जल्द सुनवाई जरूरी है. वकील ने अदालत से कहा कि अगर मामले को कल सूचीबद्ध किया जाए तो कोर्ट संतुष्ट होने पर अंतरिम आदेश भी पारित कर सकता है.
वकील की दलील सुनने के बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सख्त लहजे में कहा, ‘आपको यह एक दिन पहले याद आया? कोई अर्जेंसी नहीं है.’ सीजेआई की इस टिप्पणी के बाद कोर्ट ने मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया.शीर्ष अदालत ने साफ संकेत दिया कि किसी त्योहार से ठीक पहले अचानक अर्जेंसी बताकर तत्काल सुनवाई की मांग को वह उचित नहीं मानती. हालांकि कोर्ट ने याचिका को खारिज नहीं किया है, लेकिन उसे तत्काल सुनवाई के लिए स्वीकार करने से इनकार कर दिया.
भारत में कई राज्यों में गोहत्या पर पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध है. याचिकाकर्ताओं का तर्क आमतौर पर यह होता है कि मौजूदा कानूनों का उल्लंघन हो रहा है और त्योहार के मौके पर बड़े पैमाने पर गोहत्या या अवैध वध की आशंका बढ़ जाती है. यह याचिका बकरीद (ईद-उल-अजहा) से ठीक पहले आई है, जब देश के कई हिस्सों में गोहत्या और पशु वध को लेकर सख्त कानून लागू हैं, लेकिन कुछ राज्यों में अमल पर सवाल उठते रहते हैं. इस बार याचिका में गोहत्या विरोधी कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई थी.















