बांदा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मनरेगा के स्वरूप में बदलाव के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में प्रस्तावित विधानसभा घेराव कार्यक्रम के तहत किया जा रहा था। प्रदेश भर से हजारों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को लखनऊ पहुंचकर विधानसभा घेराव करना था, लेकिन बांदा से रवाना हुए कार्यकर्ताओं को मेन रोड पर भारी पुलिस बल ने रोक लिया। पुलिस की घेराबंदी से आक्रोशित कांग्रेसियों और पुलिस के बीच नोकझोंक की स्थिति बन गई, जिसके बाद कार्यकर्ता सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और सरकार विरोधी नारे लगाए। “जब-जब मोदी योगी डरता है, पुलिस को आगे करता है” और “मनरेगा का अधिकार लेकर रहेंगे” जैसे नारों से माहौल गूंज उठा।
धरने पर बैठे जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित ने मीडिया से बातचीत में कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने यूपीए-1 सरकार के दौरान शुरू की गई महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के मूल स्वरूप को कमजोर करने का काम किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि योजना से गांधी जी का नाम हटाना और उसके प्रावधानों में बदलाव करना गरीबों के अधिकारों का हनन है। उनका कहना था कि वर्ष 2026 से कांग्रेस इस मुद्दे पर निरंतर संघर्ष कर रही है और सड़क से लेकर संसद तक लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने प्रदेश सरकार पर दमनकारी नीति अपनाने और पुलिस के जरिए आवाज दबाने का आरोप भी लगाया।
जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष सीमा खान एडवोकेट ने कहा कि यूपीए सरकार के समय मनरेगा में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की गई थी, जिससे लाखों गरीब महिलाओं को रोजगार मिला। वर्तमान सरकार पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि योजना में राज्य सरकार की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी तय कर इसे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, जबकि पहले से ही राज्यों पर भारी कर्ज है। उन्होंने इसे महिलाओं के अधिकारों पर प्रहार बताते हुए आरपार की लड़ाई का ऐलान किया।प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जिलाध्यक्ष सहित कई पदाधिकारियों को जबरन उठाकर घर के भीतर नजरबंद कर दिया और चारों ओर कड़ा पहरा लगा दिया। इस कार्रवाई के बावजूद कांग्रेस नेताओं ने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया।















