चीन ने तैयार किए छोटे-छोटे शहर बर्बाद करने वाले परमाणु बम,

चीन के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका ने गंभीर आरोप लगाए हैं. अमेरिका का कहना है कि चीन ने 22 जून 2020 को शिनजियांग क्षेत्र के लोप नूर में सीक्रेट और कम क्षमता वाला परमाणु परीक्षण किया थाअमेरिकी अधिकारियों की रिपोर्ट के मुताबिक, यह विस्फोट जमीन के नीचे हुआ और इसकी तीव्रता 2.75 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई. उनका अनुमान है कि इस विस्फोट की क्षमता 5 से 10 टन TNT के बराबर थी.

जापान के हिरोशिमा पर 1945 में गिराए गए परमाणु बम की क्षमता 15 किलोटन थी. यानी अमेरिका का दावा है कि चीन का यह परीक्षण हिरोशिमा बम से करीब 1500 गुना छोटा था. हालांकि छोटा होने के बावजूद ऐसे कम क्षमता वाले परमाणु बम किसी छोटे इलाके को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं. जिनेवा में निरस्त्रीकरण सम्मेलन के दौरान अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री क्रिस्टोफर यीव ने कहा कि चीन तेजी से अपना परमाणु जखीरा बढ़ा रहा है.

2030 तक चीन के पास कितने हथियार होंगे

अमेरिका का दावा है कि चीन 2030 तक 1000 से ज्यादा न्यूक्लियर वॉरहेड बनाने लायक फिसाइल मटेरियल जुटा सकता है. क्रिस्टोफर यीव ने यह भी कहा कि आने वाले चार से पांच साल में चीन परमाणु क्षमता में बराबरी के स्तर तक पहुंच सकता है, हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि बराबरी से उनका मतलब किस देश से है. चीन ने इन आरोपों को खारिज किया है.

संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत शेन जियान ने कहा कि अमेरिका के आरोप निराधार हैं. उन्होंने कहा कि चीन किसी भी देश के साथ परमाणु हथियारों की दौड़ में शामिल नहीं होगा और उसका परमाणु जखीरा अमेरिका और रूस जितना बड़ा नहीं है. अमेरिका और रूस के बीच न्यू स्टार्ट संधि 5 फरवरी को खत्म हो गई. यह दोनों देशों के बीच आखिरी बड़ी परमाणु हथियार नियंत्रण संधि थी. संधि के तहत दोनों देशों को 1550 तैनात परमाणु वॉरहेड तक सीमित रखा गया था. हालांकि दोनों देशों के पास मिलाकर 10 हजार से ज्यादा परमाणु हथियार हैं.

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