मुजफ्फरनगर में बाल श्रम को जड़ से समाप्त करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर अभियान चलाया गया। माननीय जिलाधिकारी उमेश मिश्रा के आदेश और सहायक श्रम आयुक्त देवेश सिंह के निर्देशन में श्रम प्रवर्तन अधिकारी शालू राणा, थाना एएचटी प्रभारी सर्वेश कुमार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की संयुक्त टीम ने जनपद में विशेष अभियान संचालित किया। इस दौरान विभिन्न प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया और आठ सेवायोजकों को निरीक्षण टिप्पणी देते हुए उनके विरुद्ध बाल श्रम अधिनियम 1986 के तहत कानूनी कार्रवाई अमल में लाई गई। अभियान का उद्देश्य न केवल बाल श्रम को रोकना है बल्कि समाज को यह संदेश देना भी है कि बच्चों का प्रथम अधिकार शिक्षा है और उन्हें पढ़ाई से वंचित कर कार्य कराने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।सहायक श्रम आयुक्त देवेश सिंह ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कोई सेवायोजक 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों से कार्य कराता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बच्चे राष्ट्र का भविष्य हैं और उनकी सही उम्र में शिक्षा दिलाना प्रत्येक अभिभावक और समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने जनपद के सभी प्रतिष्ठानों से अपील की कि वे बाल श्रम को बढ़ावा न दें, बल्कि बच्चों के जीवन को उज्ज्वल बनाने में सहयोग करें।इस अभियान में संस्था एक्सेस टू जस्टिस जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन और ग्रामीण समाज विकास केंद्र ने भी प्रशासन के साथ मिलकर सक्रिय भूमिका निभाई। संस्था के प्रोजेक्ट लीडर गजेंद्र सिंह ने कहा कि संगठन सदैव बालहित के मुद्दों पर प्रशासन का साथ देता आया है और आगे भी इसी प्रकार सहयोग करता रहेगा। उन्होंने बताया कि बाल श्रम बच्चों के भविष्य को अंधकार की ओर ले जाता है, इसलिए इसे रोकने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।अभियान को सफल बनाने में थाना एएचटी टीम से सब इंस्पेक्टर जगत सिंह, सब इंस्पेक्टर खुशवीर सिंह और हेड कांस्टेबल अमरजीत सिंह ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े पैरालीगल वॉलंटियर गौरव मालिक और अन्य सहयोगियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। यह संयुक्त प्रयास दर्शाता है कि जब प्रशासन और सामाजिक संगठन एक साथ काम करते हैं तो किसी भी सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करना संभव हो सकता है।मुजफ्फरनगर में चलाए गए इस बाल श्रम मुक्त अभियान ने यह साबित कर दिया कि सरकार और समाज दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी है कि बच्चों को उनके अधिकार दिलाए जाएं। बाल श्रम न केवल बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास में बाधा डालता है, बल्कि देश के उज्ज्वल भविष्य पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। ऐसे में यह आवश्यक है कि हर स्तर पर बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता फैलाई जाए और दोषियों को कानून के दायरे में लाकर सख्त सजा दी जाए। इस प्रकार के अभियान आगे भी समय–समय पर चलाए जाते रहेंगे ताकि जनपद को पूरी तरह बाल श्रम मुक्त बनाया जा सके।















