पश्चिम एशिया युद्ध से रुका चाबहार प्रोजेक्ट, ईरान बोला युद्ध खत्म होते ही तेज होगी रफ्तार

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते भारत की मदद से विकसित हो रहा ईरान का रणनीतिक चाबहार बंदरगाह फिलहाल ठप पड़ा है। इस स्थिति से पाकिस्तान भले ही अंदर ही अंदर संतुष्ट नजर आ रहा हो, लेकिन उसकी यह खुशी ज्यादा दिन टिकने वाली नहीं है। ईरान ने साफ कर दिया है कि युद्ध समाप्त होते ही इस महत्वपूर्ण परियोजना पर काम तेजी से शुरू कर दिया जाएगा।

ईरानी राजदूत का भरोसा—हालात सुधरते ही बढ़ेगी गति

भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने कहा कि मौजूदा युद्ध के कारण कुछ बाधाएं जरूर आई हैं, लेकिन भारत-ईरान के आर्थिक संबंध मजबूत बने हुए हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि जैसे ही हालात सामान्य होंगे, चाबहार परियोजना पर काम तेज गति से आगे बढ़ेगा। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच सहयोग आपसी विश्वास और हितों पर आधारित है, जो भविष्य में और मजबूत होगा।

भारत-ईरान संबंधों पर युद्ध का सीमित असर

फथाली ने स्पष्ट किया कि युद्ध के दौरान पैदा हुई दिक्कतें अस्थायी हैं और इसे केवल एक गतिरोध के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तेहरान को भारत के साथ अपने आर्थिक रिश्तों के भविष्य को लेकर पूरा भरोसा है और युद्ध के बाद इन संबंधों में नई ऊर्जा देखने को मिलेगी।

ट्रेड और ट्रांजिट के लिए अहम है चाबहार

ईरानी राजदूत ने चाबहार बंदरगाह को एक रणनीतिक परियोजना बताते हुए कहा कि यह भारत, ईरान और पूरे क्षेत्र के बीच व्यापार और ट्रांजिट को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। खास बात यह है कि इसके जरिए भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने के लिए पाकिस्तान पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

मध्य एशिया का ‘गोल्डन गेट’ बनेगा चाबहार

चाबहार बंदरगाह को मध्य एशिया के लिए ‘गोल्डन गेट’ माना जाता है। यह लैंडलॉक्ड देशों को समुद्र से जोड़ने का काम करेगा और एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट हब के रूप में उभर सकता है। इससे वैश्विक व्यापार को नया मार्ग मिलेगा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

भारत का बड़ा निवेश, आगे और विस्तार की योजना

भारत ने इस परियोजना में 350 मिलियन डॉलर से अधिक निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। इसमें आधुनिक उपकरण, बर्थ निर्माण और भविष्य में अतिरिक्त बर्थ व रेल कनेक्टिविटी के लिए क्रेडिट लाइन शामिल हैं। यह निवेश चाबहार को एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अमेरिकी प्रतिबंधों की समयसीमा भी नजदीक

इस बीच, ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट की अंतिम तारीख 26 अप्रैल 2026 नजदीक आ रही है। ऐसे में भारत इस परियोजना को लेकर अपने विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। बावजूद इसके, ईरान के ताजा बयान से संकेत मिलते हैं कि चाबहार प्रोजेक्ट का भविष्य सुरक्षित और सकारात्मक बना हुआ है।

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