करीब तीन साल तक देश की राजनीति और खेल जगत के केंद्र में रहे महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को बीजेपी के पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त और भरोसेमंद साक्ष्य पेश नहीं कर सका। इसी आधार पर अदालत ने सह-आरोपी और WFI के पूर्व असिस्टेंट सेक्रेटरी विनोद तोमर को भी बरी कर दिया।एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्विनी पंवार ने यह फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में मीडिया के प्रवेश पर रोक थी। फैसला आने के बाद बृजभूषण सिंह की ओर से पेश वकीलों ने राजीव मोहन, ऋषभ भाटी, रेहान खान और सूर्यांश सिंह ने इसे “सम्मानजनक बरी” बताया।
बयान बदले और सबूत नहीं मिले
अभियोजन पक्ष ने भी माना कि ट्रायल के दौरान केस कई वजहों से कमजोर पड़ गया। एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर मनीष रावत ने बताया कि छह शिकायतकर्ताओं में से दो महिला पहलवान अपने पहले दिए गए बयानों से पलट गईं, जिससे अभियोजन का मामला प्रभावित हुआ। एक अन्य शिकायत साल 2012 की कथित घटना से जुड़ी थी, जिसे अदालत ने कानूनी समय-सीमा (लिमिटेशन) के दायरे से बाहर माना। बाकी शिकायतों में भी गवाहों के बयान और रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों के बीच महत्वपूर्ण विरोधाभास सामने आए.
चार्जशीट में लगीं थीं ये गंभीर धाराएं
यह मामला उस समय राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था, जब देश की कई नामी महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न, पीछा करने और आपराधिक धमकी देने के आरोप लगाए थे। शिकायतों के बाद दिल्ली पुलिस ने 15 जून 2023 को आईपीसी की धारा 354, 354ए, 354डी और 506 समेत अन्य धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की थी।
ट्रायल के बाद सबूत नहीं हुए साबित
मई 2024 में ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए बृजभूषण सिंह के खिलाफ आरोप तय किए थे कि मुकदमा चलाने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार मौजूद हैं। हालांकि, ट्रायल के दौरान गवाहों की गवाही, जिरह और अन्य साक्ष्यों के अंतिम मूल्यांकन के बाद अदालत इस नतीजे पर पहुंची कि आरोपों को कानूनन आवश्यक स्तर तक सिद्ध नहीं किया जा सका। इसी आधार पर दोनों आरोपियों को बरी कर दिया गया।
पॉक्सो मामला पहले ही हो चुका था बंद
इस मामले से अलग एक नाबालिग पहलवान की शिकायत पर दर्ज पॉक्सो (POCSO) मामला पहले ही खत्म हो चुका था। शिकायतकर्ता द्वारा आरोप वापस लेने के बाद दिल्ली पुलिस ने उस मामले में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल की थी। फैसले के बाद अभियोजन पक्ष ने कहा कि विस्तृत आदेश का अध्ययन करने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।























































