दिल्ली के भारत मंडपम में शनिवार को आधिकारिक रूप से BRICS समिट की शुरुआत हो चुकी है. पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से लेकर चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग और ईरानी राष्ट्रपति समेत कई राष्ट्राध्यक्षों का स्वागत किया. इस बीच शिक्षा और विदेश मंत्रालय ने भारत मंडपम में 11-12 सितंबर को ‘भारत इनोवेट्स एक्सपोजिशन’ नाम से प्रदर्शनी भी लगाई है, जिसमें अंतरिक्ष, स्वास्थ्य जैसे कई क्षेत्रों से जुड़े 37 डीप-टेक इनोवेशन और उससे जुड़े स्टार्टअप को प्रदर्शित किया गया है. इसका उदेश्य देश में होने वाले इनोवेशन और स्टार्टअप को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के साथ ही निवेशक व वैश्विक साझेदार जुटाना है.भारत ने इससे पहले फ्रांस के नीस शहर में 14 से 16 जून 2026 को भारत इनोवेट्स नाम से डीप-टेक इनोवेशन की ब्रांडिंग की थी. डीप टेक इनोवेशन में एडवांस्ड फ्लोटिंग सोलर पीवी प्लेटफार्म, रोबोटिक प्लेटफार्म, एआई-इनेबल्ड सरवाइकल कैंसर स्क्रीनिंग आदि शामिल हैं.
भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी में जाएंगे ब्रिक्स नेता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी और ब्रिक्स प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के इस प्रदर्शनी में आने की उम्मीद है. ब्रिक्स सदस्य देशों के सीनियर भारतीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि, सीडीओ, निवेशक और व्यावसायिक नेता भी इस कार्यक्रम में भाग लेंगे. शिक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस प्लेटफॉर्म से भारतीय डीप-टेक उद्यमों के लिए बी2बी जुड़ाव, प्रौद्योगिकी साझेदारी, वित्तीय संबंधी चर्चाएं, व्यावसायिक संबंध और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच को सुविधाजनक बनाने की उम्मीद है.
क्या है भारत इनोवेट्स?
भारत इनोवेट्स शिक्षा मंत्रालय की एक पहल है, जिसे भारत के हायर एजुकेशन इनोवेशन इकोसिस्टम को वैश्विक हितधारकों से जोड़ने के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें स्टार्टअप, उच्च शिक्षा संस्थान, प्रयोगशालाएं और अनुसंधान पार्क, साथ ही कॉरपोरेट, निवेशक, विश्वविद्यालय, अनुसंधान संस्थान और सरकारें शामिल हैं.
पीएम मोदी ने की ‘नई दिल्ली घोषणा’ अपनाने की घोषणा
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणा 2026 को सर्वसम्मति से अपनाने की घोषणा की है. उन्होंने शिखर सम्मेलन में कहा कि किसी भी सदस्य ने कोई आपत्ति नहीं उठाई है, नई दिल्ली घोषणा 2026 को सर्वसम्मति से अपनाया गया है. रॉयटर्स के मुताबिक, संयुक्त घोषणापत्र में संघर्षों की रोकथाम के प्रयासों में लगे रहने की जरूरत पर बल दिया गया, जिसमें उनके मूल कारणों का समाधान करना भी शामिल है. इसमें ब्रिक्स देशों की संवाद, परामर्श और कूटनीति के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया गया.























































