मुजफ्फरनगर में बाल श्रम के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए व्यापक छापेमारी अभियान चलाया। जिलाधिकारी उमेश मिश्रा और सहायक श्रम आयुक्त देवेश सिंह के निर्देशन में श्रम परिवर्तन अधिकारी विंध्याचल शुक्ला, मानव तस्करी विरोधी थाना प्रभारी जय सिंह भाटी, जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन संस्था और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की संयुक्त टीम ने जनपद के जड़ौदा गांव, मुजफ्फरनगर बायपास, ट्रांसपोर्ट नगर और भोपा रोड सहित विभिन्न स्थानों पर औचक निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने 8 बाल श्रमिकों को चिन्हित कर उन्हें बाल श्रम से मुक्त कराया, जबकि 6 सेवायोजकों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई शुरू की गई।
अभियान के दौरान अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कराना कानूनन अपराध है। सहायक श्रम आयुक्त देवेश सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार के बाल श्रम मुक्त अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत 14 वर्ष तक के सभी बच्चों के लिए निशुल्क शिक्षा का प्रावधान है और शिक्षा प्राप्त करना उनका मौलिक अधिकार है। उन्होंने सभी नियोक्ताओं से अपील की कि वे 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी कार्य में न लगाएं और उन्हें विद्यालय भेजने में सहयोग करें।
मानव तस्करी विरोधी थाना प्रभारी जय सिंह भाटी ने भी लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि बाहरी राज्यों से आने वाले श्रमिकों और बच्चों की जानकारी संबंधित थाना और विभाग को देना आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर समय रहते रोक लगाई जा सके। वहीं जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन संस्था से जुड़े ग्रामीण समाज विकास केंद्र के प्रोजेक्ट मैनेजर गजेंद्र ने कहा कि संस्था हमेशा बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रशासन के साथ मिलकर काम करती रहेगी और बाल श्रम के खिलाफ ऐसे अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाती रहेगी।
इस संयुक्त कार्रवाई में सब इंस्पेक्टर जगत सिंह, हेड कांस्टेबल अमरजीत और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम से गौरव मालिक सहित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि बाल श्रम कराने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।















