बांदा। दिल्ली की तर्ज पर अब बुंदेलखंड के बांदा शहर की वायु गुणवत्ता भी गंभीर स्थिति में पहुंच गई है। शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 253 दर्ज किया गया है, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है और आमजन के स्वास्थ्य के लिए खतरे का संकेत देता है। इस बढ़ते पर्यावरणीय संकट को देखते हुए बांदा के छात्र नेताओं ने डिजिटल और ज़मीनी स्तर पर एक व्यापक जन-जागरूकता मुहिम शुरू की है। सोशल मीडिया और जनसंपर्क के माध्यम से वे शहरवासियों से इस समस्या पर तत्काल ध्यान देने और ठोस कदम उठाने की अपील कर रहे हैं।
छात्र नेताओं का कहना है कि बांदा में कोई बड़ा औद्योगिक क्षेत्र न होने के बावजूद AQI का इतना अधिक होना चिंताजनक है। इससे साफ है कि स्थानीय कारण—जैसे कचरा जलाना, वाहनों का अत्यधिक उपयोग और हरियाली की कमी—प्रदूषण बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए मुहिम के तहत शहरवासियों से पांच महत्वपूर्ण कदम अपनाने की अपील की गई है। इनमें अधिक से अधिक टेरेस और बालकनी गार्डन विकसित करना, घरों और सड़कों के किनारे सघन वृक्षारोपण करना, छोटी दूरी के लिए पैदल चलना या साइकिल का उपयोग करना, कचरा विशेषकर प्लास्टिक और सूखी पत्तियों को जलाने पर पूर्ण रोक लगाना, तथा सिंगल-यूज प्लास्टिक का बहिष्कार करना शामिल है।
छात्र नेता लव सिन्हा ने कहा कि हमारा भविष्य साफ हवा पर निर्भर करता है, इसलिए समाज के हर वर्ग को जागरूक होना होगा। शैलेंद्र कुमार वर्मा ने कहा कि बांदा छोटा शहर है, लेकिन 253 का AQI यह बता रहा है कि हम पर्यावरण के प्रति बड़ी गलती कर रहे हैं। यशराज गुप्ता ने पर्यावरण विभाग से इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की। साजिद अली ने कहा कि आज हम दूषित हवा में जीने को मजबूर हैं, जो भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है। दीपक गुप्ता का कहना है कि यदि छात्र अभी संभल गए तो निश्चित रूप से सकारात्मक बदलाव आएगा और साफ हवा मिल सकेगी।















