महर्षि वाल्मीकि प्रकटोत्सव पर राजकीय अवकाश घोषित होने से बाल्मीकि समाज ने मंत्री कपिल देव अग्रवाल का किया भव्य स्वागत

मुजफ्फरनगर में महर्षि वाल्मीकि प्रकटोत्सव को लेकर ऐतिहासिक निर्णय सामने आया, जब उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 7 अक्टूबर 2025 को महर्षि वाल्मीकि जयंती पर पुनः राजकीय अवकाश घोषित किया गया। इस फैसले से बाल्मीकि समाज में खुशी की लहर दौड़ गई और समाज के लोगों ने हर्षोल्लास के साथ मंत्री कपिल देव अग्रवाल का स्वागत किया। समाज ने इस अवसर पर सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का आयोजन भाबाधस जिला अध्यक्ष कपिल पहिवाल के नेतृत्व में हुआ, जिसमें सैकड़ों की संख्या में सम्मानित बंधु मंत्री कपिल देव अग्रवाल के आवास पर पहुंचे। समाज के लोगों ने फूलमालाओं से मंत्री का अभिनंदन किया और अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। यह समारोह केवल बाल्मीकि समाज की भावनाओं का प्रतीक रहा, बल्कि सरकार की संवेदनशीलता और समाज के योगदान के प्रति सम्मान को भी उजागर करता है।मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने इस मौके पर कहा कि महर्षि वाल्मीकि प्रकटोत्सव पर अवकाश घोषित करना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की समाज की भावनाओं के प्रति गहरी संवेदनशीलता और आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जी के अमर योगदान के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार समाज और राष्ट्र के उत्थान के लिए लगातार ऐतिहासिक कदम उठा रही हैं। भाजपा सरकार की जनहितकारी योजनाओं और पारदर्शी नीतियों ने समाज के हर वर्ग को सशक्त बनाया है और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए हैं। मंत्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हृदय से आभार प्रकट करते हुए पूरे प्रदेशवासियों और विशेषकर वाल्मीकि समाज को इस पावन अवसर पर शुभकामनाएँ दीं।इस कार्यक्रम में भाजपा जिला महामंत्री रोहिल बाल्मीकि, सन्नी सिलेलान, शुभम खेरवाल, डॉ. प्रदीप, चमन लाल बाल्मीकि, सागर बाल्मीकि, राजकुमार बेनीवाल, भारत कुशल, अर्जुन टांक, सूरज राजू बेनीवाल, सुभाष, अजय टांक, संदीप, अरुण अटवाल, दीपक सहित बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ता और समाज के लोग उपस्थित रहे। समारोह में युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने इसे और अधिक विशेष बना दिया। सभी ने एक स्वर में सरकार के इस निर्णय की सराहना की और इसे समाज की गरिमा और महर्षि वाल्मीकि जी के प्रति सम्मान का परिचायक बताया।कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने कहा कि यह अवकाश केवल बाल्मीकि समाज बल्कि पूरे समाज के लिए गर्व का विषय है, क्योंकि महर्षि वाल्मीकि का योगदान भारतीय संस्कृति और साहित्य में अमूल्य है। उनके आदर्श आज भी समाज को दिशा देते हैं। स्वागत समारोह ने यह संदेश दिया कि जब सरकार समाज की भावनाओं को समझकर निर्णय लेती है, तो जनता उसे पूरे दिल से स्वीकार करती है और उसका आभार प्रकट करती है।कुल मिलाकर, यह कार्यक्रम बाल्मीकि समाज की खुशी और सरकार के प्रति कृतज्ञता का जीवंत उदाहरण बना। इस आयोजन ने यह भी सिद्ध किया कि समाज और सरकार के बीच बेहतर संवाद और आपसी सम्मान ही एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र की नींव है।

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