मुजफ्फरनगर। पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती के अवसर पर ललित कला संकाय में एक भव्य कला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने अद्भुत उत्साह, ऊर्जा और रचनात्मकता के साथ भाग लिया। इस प्रतियोगिता का प्रमुख उद्देश्य बच्चों के प्रिय चाचा नेहरू के विचारों, व्यक्तित्व और समाज के प्रति उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाना था। विद्यार्थियों ने इस आयोजन को कला, संवेदना और प्रेरणा का सुंदर संगम बनाते हुए अपनी कल्पनाशीलता से नेहरू के आदर्शों को जीवंत चित्रों और कलाकृतियों में प्रस्तुत किया।कार्यक्रम में कोलाज मेकिंग, पोस्टर डिजाइन और क्राफ्ट मेकिंग की श्रेणियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला, जहां प्रतिभागियों ने अपनी–अपनी कलात्मक कौशल का ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने निर्णायक मंडल और संकाय के शिक्षकों को अत्यंत प्रभावित किया। कई विद्यार्थियों ने नेहरू के बच्चों के प्रति प्रेम को अपनी कलाकृतियों में इतने सहज और भावपूर्ण तरीके से उकेरा कि उपस्थितजन मंत्रमुग्ध रह गए।इस अवसर पर संबोधित करते हुए डॉ. मनोज धीमान ने कहा कि बाल दिवस बच्चों के प्रति नेहरू के अपार प्रेम और उनके जीवन–दर्शन का प्रतिक है। उन्होंने कहा कि नेहरू का बचपन के प्रति स्नेह, उनका शिक्षण दृष्टिकोण और राष्ट्र निर्माण की उनकी दूरदर्शी सोच आज भी बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। डॉ. धीमान ने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि रचनात्मकता केवल कला का विषय नहीं, बल्कि विचारों को सकारात्मक दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।प्रतियोगिता के समापन पर निर्णायकों ने विभिन्न श्रेणियों में विजेताओं की घोषणा की और सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए। उन्होंने कहा कि छात्रों की कलाकृतियाँ न केवल कलात्मक दृष्टि से उत्कृष्ट रहीं, बल्कि उनमें नेहरू के सिद्धांतों और आदर्शों की गहन समझ भी देखने को मिली।ललित कला संकाय के अधिष्ठाता ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन छात्रों में कला–संवर्धन के साथ–साथ राष्ट्रनिर्माताओं के विचारों से जुड़ाव का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा को अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान करती हैं और उन्हें समाज, राष्ट्र और संस्कृति के प्रति जागरूक बनाती हैं।कार्यक्रम को सफल बनाने में विभाग की विभागाध्यक्षा मीनाक्षी काकरान, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनु, बिन्नू पुंडीर, रजनीकांत, रीना त्यागी, मयंक सैनी, अजित एवं शहज़ादी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सभी के संयुक्त सहयोग से यह आयोजन न केवल सफल रहा, बल्कि विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक सीख और यादगार अनुभव का अवसर भी बन गया।















