सहारनपुर। जनपद के आयशा मॉडल स्कूल में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम का आयोजन जागरूकता और स्वास्थ्य सुरक्षा के उद्देश्य से किया गया। कार्यक्रम के तहत विद्यालय में अध्ययनरत 2 वर्ष से 18 वर्ष तक के बच्चों को एल्बेंडाजोल की खुराक दी गई। इस अवसर पर स्कूल प्रबंधक मुजाहिद नदीम ने बताया कि दूषित वातावरण, अस्वच्छ खानपान और गंदे हाथों से भोजन करने की आदत के कारण बच्चों की आंतों में कृमि संक्रमण हो जाता है, जिससे उनके शरीर में पोषक तत्वों की कमी उत्पन्न हो जाती है। उन्होंने कहा कि आंतों में कीड़े होने से बच्चे कुपोषण का शिकार हो जाते हैं और उनमें पेट दर्द, खून की कमी, उल्टी, मतली, दस्त, थकान और वजन में कमी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास भी प्रभावित होता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें और समय-समय पर कृमि मुक्ति की दवा अवश्य दिलाएं।
विद्यालय की प्रधानाचार्या आयशा जमाल ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए साफ-सफाई अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बच्चों को कभी भी बिना हाथ धोए भोजन नहीं करना चाहिए और भोजन को हमेशा ढककर रखना चाहिए ताकि उसमें गंदगी या मक्खियां न बैठें। उन्होंने साफ और उबले हुए पानी के उपयोग पर भी जोर दिया और कहा कि यदि हम स्वच्छ आदतों को अपनाते हैं तो अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है। प्रधानाचार्या ने बताया कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का मुख्य उद्देश्य बच्चों को कृमि संक्रमण से मुक्त कर स्वस्थ और सशक्त बनाना है ताकि वे पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने बच्चों को हाथ धोने के सही तरीके, स्वच्छता बनाए रखने और खुले में गंदगी न फैलाने के बारे में भी जानकारी दी। बच्चों को समझाया गया कि बाहर खेलते समय वे किन-किन वस्तुओं को छूते हैं, इसका उन्हें ध्यान नहीं रहता, इसलिए घर लौटकर साबुन से हाथ धोना बेहद जरूरी है। कार्यक्रम में रूबी दानिश, मुदस्सिर, शबाना, रोहिणा, रिम्शा, कुलसुम, शिबा, नशरा, रिजवा, अलीशा, फिजा, शबनम सहित अन्य स्टाफ सदस्य और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। विद्यालय प्रशासन ने संकल्प लिया कि भविष्य में भी ऐसे स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, जिससे बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।















