नंदगांव में फाल्गुन शुक्ल पक्ष दशमी को पारंपरिक लट्ठमार होली का आयोजन हुआ। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है, जब नंदगांव के हुरियारे बरसाना में होली खेलने जाते हैं और अगले दिन बरसाना की सखियां नंदगांव पहुंचती हैं।
आशिशेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में बरसाना की गोपियां इकट्ठा होती हैं और नंद भवन के लिए प्रस्थान करती हैं। वहां समाज गायन के साथ ग्वाल-बालों और गोपियों के बीच रंगों और गुलाल की वर्षा होती है। नंदगांव के ग्वाल-बाल बरसाना की सखियों का स्वागत करते हैं, और चारों ओर “नंदलाल की जय” और “राधा रानी की जय” के उद्घोष गूंजते हैं।

श्रद्धालु भक्त इस अलौकिक नज़ारे को देखकर आत्मविभोर हो गए। समाज गायन और पारंपरिक होली गीतों के साथ भक्तों ने आनंद लिया। इस दौरान “होली रे रसिया” और “नैनन में कोई गाड़ी” जैसे भजन गूंजते रहे।
हालांकि, पुलिस और प्रशासन की व्यवस्थाओं में कुछ खामियां रहीं, जिससे श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। श्रद्धालुओं ने प्रशासन से आग्रह किया कि भविष्य में ऐसे धार्मिक आयोजनों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाएं।
ब्रजमंडल में होली का उत्सव नव संवत्सर तक चलता है, जिसमें अलग-अलग स्थानों पर विविध होली महोत्सव आयोजित होते हैं। एकादशी को वृंदावन, गोकुल, महावन, दाऊजी और गोवर्धन धाम में भी अनूठी होली की परंपराएं निभाई जाती हैं। चैत्र कृष्ण पक्ष द्वितीया को गिरिराज धरण के श्री हरिदेव जी महाराज का डोला महोत्सव विश्वकुंड पर संपन्न होगा।















