बाँदा। लगभग दो सालों से जिला अस्पताल में नर्स की ड्यूटी से नदारद श्वेता पटेल का मुद्दा अब और गर्म होता दिख रहा है। जेडीयू नेता के आरोप के बाद खबर की पड़ताल करने जिला अस्पताल पहुंचे तो,जिला अस्पताल के जिम्मेदार कर्मियों ने नाम न लिखने पर कहा कि डंके की चोट पर कहते हैं मामला सही है। हमने कही महीनों से श्वेता पटेल को ड्यूटी करते हुए नही देखा है। अगर जांच सही स्तर से हो जाये तो सच्चाई सब के सामने होगी। सांसद की बेटी है इसलिए कोई कुछ नहीं बोलता है। सारे स्टाफ को पता है कि श्वेता पटेल की मम्मी के सांसद बनने के बाद कभी ड्यूटी करने नही आई है।अपनी ड्यूटी एक संजय नाम के युवक से करवाती थी। अपनी बेटी को फसता देख सांसद कृष्णा पटेल ने कहा कि उनकी बेटी की तबियत खराब हो गई थी शनिवार को वापस आ गई थी। अगर गई थी तो किसी ने देखा होगा सीसीटीवी फुटेज होंगे लेकिन जिला अस्पताल के कर्मियों ने बताया कि सब झूठ है श्वेता पटेल सालों से नही आ रही है। सीसीटीवी लगे हैं जांच में सब पता चल जाएगा। कुछ लोगो ने तो यह तक कह दिया है जांच गरीब लोगो के लिए होती है। बड़े परिवार से जुड़े हुए लोगो के लिए नही। पंद्रह दिनों के सीसीटीवी फुटेज से जांच का मामला पता किया जा सकता है।
फिलहाल जिला अस्पताल के कर्मियों का साफ कहना है कि पुत्री को बचाने के लिए सांसद ऐसा बयान दे रही है जिसके लिए सब जानते हैं। अगर ईमानदारी से उपस्थिति रजिस्टर की जांच, ड्यूटी अवधि के सीसीटीवी फुटेज जांच, मोबाइल लोकेशन की जांच ईमानदारी से हो गई तो फिर सांसद जी के बयान का क्या होगा। फिलहाल सभी की निगाह जांच में लगी है कि सांसद पुत्री की जांच होगी भी या फिर किसी तरह से निपटा दी जाएगी। सबसे बड़ा सवाल ये है कि यदि सही में श्वेता पटेल ड्यूटी नही कर रही थी, प्रतिदिन कौन उपस्थिति दर्ज करता था? ड्यूटी न करने पर भी वेतन भुगतान कैसे किया गया? आखिर कैसे कोई महिला नर्स की जगह एक युवक निरन्तर कर्मी बनकर जिला अस्पताल में ड्यूटी कर रहा था? क्या इन सभी बातों से जिला अस्पताल के सीएमएस को कुछ नहीं पता था। या फिर सीएमएस को सब कुछ पता होने के बाद भी वह अपनी शय पर सब करवा रहे थे?















