देश में परीक्षा कराने वाली एजेंसियों और अभ्यर्थियों के डेटा की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. पेपर लीक के विवादों के बीच चौंकाने वाला मामला आया है.राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं में बैठने वाले लाखों स्टूडेंट्स का पर्सनल डेटा इंटरनेट पर बेचा जा रहा है. नीट और सीयूईटी जैसी परीक्षाओं के उम्मीदवारों के नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल और माता-पिता के नाम जैसी गोपनीय जानकारियां कुछ वेबसाइट्स पर कौड़ियों के भाव उपलब्ध हैं.
देश में ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन’ (DPDP) एक्ट लागू किया जा रहा है. ऐसे में इस अवैध कारोबार ने स्टूडेंट प्राइवेसी सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है. ये वेबसाइट्स प्राइवेट यूनिवर्सिटी और एडमिशन कंसल्टेंट्स को डेटा बेच रही हैं, जिससे वे स्टूडेंट्स को एडमिशन के लिए टारगेट कर सकें. डेटा बेचने वाली कंपनियां इसे जायज बता रही हैं, वहीं हर दिन आने वाले अनचाहे कॉल्स और मेसेज ने स्टूडेंट्स और उनके पेरेंट्स की नींद उड़ा रखी है. जानिए प्राइवेसी में सेंधमारी का यह खेल आखिर कैसे चल रहा है.
दांव पर है 15 लाख से ज्यादा CUET स्टूडेंट्स का डेटा
हद तो तब हो गई जब studentdataprovider.com नाम की वेबसाइट पर “CUET-2026 एग्जाम डेटाबेस” नाम से लिस्टिंग लाइव कर दी गई. इस डेटाबेस में सीयूईटी परीक्षा देने वाले 15 लाख से भी अधिक कैंडिडेट्स का पूरा रिकॉर्ड होने का दावा किया गया है. इतना ही नहीं, ग्राहकों को भरोसा दिलाने के लिए वेबसाइट ने 500 स्टूडेंट्स का डेटा ‘फ्री सैंपल’ के तौर पर भी शेयर किया है, जिसमें उनके एप्लिकेशन नंबर से लेकर जन्मतिथि, जेंडर और कोटा कैटेगरी तक की जानकारियां साफ देखी जा सकती हैं.
नए DPDP कानून की उड़ीं धज्जियां, भारी जुर्माने का है प्रावधान
स्टूडेंट्स के डेटा की खुलेआम सेल देश के नए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट के इरादों को ठेंगा दिखा रही है. इस कानून के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति का पर्सनल डेटा उसकी मर्जी या सहमति के बिना किसी दूसरे काम के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. कानून में इस तरह के उल्लंघन पर 250 करोड़ रुपये तक के भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान है, हालांकि, इस कानून के सख्त नियम साल 2027 से लागू होने हैं. शायद इसीलिए ये डेटा चोर अभी बेखौफ घूम रहे हैं.
NTA का पल्ला झाड़ना और डेटा कंपनियों की अजीब दलील
इस मामले पर जब बवाल बढ़ा तो नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अपनी सफाई में कहा कि वे कैंडिडेट्स की प्राइवेसी को सबसे ऊपर रखते हैं. एनटीए का दावा है कि वे यूनिवर्सिटी के साथ रिजल्ट केवल सुरक्षित और सरकारी डिजीलॉकर (DigiLocker) या API प्लेटफॉर्म के जरिए ही शेयर करते हैं. दूसरी तरफ, दिल्ली की ‘बल्क स्टूडेंट्स डेटा’ जैसी कंपनियां इस धंधे को सही ठहराते हुए कह रही हैं कि मार्केटिंग के लिए इस डेटा का इस्तेमाल करना गैर-कानूनी नहीं है. फिलहाल आईटी मिनिस्ट्री (MeitY) इस मामले की जांच करने की बात कह रही है.















