खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग पर किए जा रहे भ्रामक दावों के खिलाफ भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सख्त रुख अपनाया है। प्राधिकरण ने कई फूड बिजनेस ऑपरेटर्स को नोटिस जारी कर ब्रांडिंग, लेबलिंग और उत्पाद संबंधी दावों में कथित अनियमितताओं पर जवाब मांगा है।साथ ही कंपनियों को आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
‘नो एडेड शुगर’ वाले आम के जूस पर सवाल
एफएसएसएआई ने प्लक्क मैंगो फ्रूट जूस के विज्ञापन और लेबलिंग पर आपत्ति जताई है। उत्पाद पर नो एडेड शुगर का दावा किया गया है, जबकि इसकी सामग्री में 51 प्रतिशत आम का गूदा और 49 प्रतिशत गन्ने का रस बताया गया है। नियामक का कहना है कि इससे उपभोक्ताओं को उत्पाद में मौजूद शर्करा की मात्रा को लेकर भ्रम हो सकता है।
नेचुरल पनीर नाम भी जांच के दायरे में
नेचुरल पनीर नाम से बेचे जा रहे एक उत्पाद को लेकर भी एफएसएसएआई ने नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण के अनुसार उत्पाद के नाम में नेचुरल शब्द का इस्तेमाल नियमों के अनुरूप नहीं है। चूंकि यह एक कंपोजिट फूड है, इसलिए नेचुरल शब्द का उपयोग उपभोक्ताओं को गुमराह कर सकता है।
टोफू पर एंटी-कैंसर दावा नियमों के खिलाफ
टोफू उत्पाद पर भी एफएसएसएआई ने सवाल उठाए हैं। उत्पाद पर 100 फीसदी वेज, विटामिन से भरपूर और एंटी-कैंसर गुण जैसे दावे किए गए हैं। नियामक का कहना है कि विटामिन की मात्रा स्पष्ट नहीं की गई है, जबकि एंटी-कैंसर जैसा दावा बीमारी से जुड़ा दावा है, जिसकी अनुमति नहीं है।
100 फीसदी नेचुरल नूडल्स पर भी कार्रवाई
मास्टरचाउ फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के रेमन नूडल्स पर किए गए 100 फीसदी नेचुरल और फ्रेशली मेड जैसे दावों को भी एफएसएसएआई ने भ्रामक माना है। इसके अलावा विज्ञापन में उच्च गुणवत्ता वाला ऑर्गेनिक आटा बताए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं, क्योंकि सामग्री सूची में प्रीमियम क्वालिटी व्हाइट फ्लोर का उल्लेख है।
किंडर जॉय के दावे पर भी आपत्ति
एफएसएसएआई ने फेरेरो इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के किंडर जॉय कोटेड वेफर बिस्किट विद कोकोआ स्प्रेड्स उत्पाद को भी नोटिस भेजा है। उत्पाद पर मिल्क सॉलिड्स से भरपूर होने का दावा किया गया है। नियामक का कहना है कि उत्पाद की संरचना इस बात की पुष्टि नहीं करती कि मिल्क सॉलिड्स इसकी प्रमुख सामग्री है।
उपभोक्ताओं को सही जानकारी देना जरूरी
एफएसएसएआई का कहना है कि खाद्य उत्पादों के पैकेट और विज्ञापनों पर किए जाने वाले दावे वैज्ञानिक तथ्यों और नियमों के अनुरूप होने चाहिए। भ्रामक दावे न केवल उपभोक्ताओं को गलत जानकारी देते हैं, बल्कि उनके खरीदारी संबंधी फैसलों को भी प्रभावित करते हैं।
कंपनियों को सुधार का निर्देश
प्राधिकरण ने सभी संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर लेबलिंग और विज्ञापन संबंधी कमियों को दूर करने तथा नियमों के अनुरूप आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए हैं।















