वाशिंगटन। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि अमेरिका और भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते के बेहद करीब हैं। व्यापार वार्ताओं और क्वाड सहयोग से लेकर समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों और क्षेत्रीय कूटनीति तक रूबियो की सभी चर्चाओं में भारत केंद्र में रहा।यह भारत के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के समक्ष 2027 के वित्तीय वर्ष के लिए बजट अनुरोध पर चर्चा के दौरान रूबियो ने बार-बार भारत का उल्लेख किया। अमेरिकी कांग्रेस के अन्य सदस्यों ने भी भारत से संबंधित मुद्दों को उठाया, जो अमेरिका की विदेश नीति चर्चाओं में देश की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
रूबियो ने कहा कि वाशिंगटन और नई दिल्ली एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के बेहद करीब हैं। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि हम अपने व्यापार समझौते पर बातचीत को जल्द पूरा कर लेंगे। संभवत: यह कुछ हफ्तों में पूरा हो जाएगा। दोनों पक्ष इसे लेकर उत्साहित हैं।”क्वाड के विदेश मंत्रियों के साथ हुई चर्चा का उल्लेख करते हुए रूबियो ने कहा कि इस वर्ष के अंत में इन नेताओं की एक और बैठक की उम्मीद है। उन्होंने समुद्री सुरक्षा में चार देशों के सहयोग की दिशा में प्रगति की भी जानकारी दी। रूबियो ने चीन पर निर्भरता कम करने के प्रयासों में भारत की भूमिका को भी रेखांकित किया।
ईरान के पास परमाणु हथियार न होना अमेरिका की ओर से लक्ष्मण रेखा : गोर
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बुधवार को इस बात पर जोर दिया कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता और यह अमेरिका की ओर से एक “लक्ष्मण रेखा” बनी हुई है। सर्जियो गोर ने यह बात ऐसे समय कही है, जब पश्चिम एशिया संघर्ष समाप्त करने के लिए वाशिंगटन और तेहरान के बीच राजनयिक और सैन्य गतिरोध जारी है।
मुंबई में ‘सिटी 2026 इंडिया कांफ्रेंस’ में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए गोर ने कहा कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले शुरू करने के बाद इस्लामिक गणराज्य ने अपने पड़ोसी देशों और कतर, सऊदी अरब तथा ओमान जैसे खाड़ी देशों पर भी हमला किया।
व्यापार समझौता करीब
सर्जियो गोर ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता करीब है। यह लगभग 99 प्रतिशत पूरा हो चुका है और केवल एक प्रतिशत काम बचा है। दोनों देश शेष एक प्रतिशत लंबित मुद्दों को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं।















