मुजफ्फरनगर में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और अवैध चिकित्सा गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया ने जनपद के सभी नर्सिंग होम और निजी अस्पतालों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी पंजीकृत चिकित्सकों की निर्धारित समय पर अस्पताल में मौजूदगी अनिवार्य होगी और किसी भी परिस्थिति में उनकी अनुपस्थिति स्वीकार नहीं की जाएगी। यह निर्देश इसलिए जारी किए गए हैं ताकि मरीजों को सही समय पर योग्य डॉक्टरों से उपचार मिल सके और स्वास्थ्य सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही न हो।
सीएमओ ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी निरीक्षण के दौरान पंजीकृत डॉक्टर अनुपस्थित पाए जाते हैं या किसी अपंजीकृत अथवा अयोग्य व्यक्ति द्वारा मरीजों का इलाज किए जाने की पुष्टि होती है, तो इसे गंभीर अनियमितता माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित अस्पताल और चिकित्सक दोनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि दोषी चिकित्सकों के खिलाफ मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को रिपोर्ट भेजी जाएगी, जबकि संबंधित अस्पताल के खिलाफ क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई करते हुए उसे सील करने और पंजीकरण निरस्त करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।
डॉ. तेवतिया ने अस्पताल संचालकों को निर्देश दिए कि वे अपने संस्थानों में सभी जरूरी दस्तावेज, पंजीकरण प्रमाण पत्र और डॉक्टरों की उपस्थिति का रिकॉर्ड पूरी तरह अपडेट और व्यवस्थित रखें। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान यदि दस्तावेजों में कोई कमी पाई जाती है तो उसे भी गंभीरता से लिया जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि जनपद में समय-समय पर औचक निरीक्षण किए जाएंगे, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बनी रहे और नियमों का सही तरीके से पालन सुनिश्चित हो सके।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि जनसामान्य को सुरक्षित, भरोसेमंद और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने सभी अस्पताल संचालकों से अपेक्षा की कि वे शासन द्वारा निर्धारित मानकों का पूरी ईमानदारी से पालन करें और मरीजों के हित को सर्वोपरि रखें। इस सख्ती के बाद माना जा रहा है कि जनपद में अवैध और लापरवाहीपूर्ण चिकित्सा गतिविधियों पर काफी हद तक अंकुश लगेगा और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।















