मुज़फ्फरनगर विधानसभा क्षेत्र के चरथावल थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम घिस्सुखेड़ा में नहर टूटने की घटना ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। अचानक नहर का किनारा टूटने से खेतों में तेज़ी से पानी भर गया, जिससे तैयार खड़ी गेहूं की फसल, गन्ना और अन्य फसलें पूरी तरह जलमग्न हो गईं। इस घटना से गांव के दर्जनों किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। किसानों का आरोप है कि नहर की समय पर मरम्मत और देखरेख नहीं की गई, जिसके चलते यह हादसा हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले भी कई बार सिंचाई विभाग को नहर की जर्जर स्थिति के बारे में अवगत कराया था, लेकिन विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र के जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और प्रभावित किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुना। किसानों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि उनकी पूरी फसल बर्बाद हो गई है और अब उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। इस दौरान जनप्रतिनिधि ने संबंधित अधिकारियों के प्रति कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि यह स्पष्ट रूप से विभागीय लापरवाही का परिणाम है, जिसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों से बात कर नुकसान का तत्काल आकलन कराने और प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा दिलाने के निर्देश दिए।
ग्रामीणों ने बताया कि इस समय गेहूं की फसल कटाई के लिए पूरी तरह तैयार थी, लेकिन अचानक आई इस आपदा ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कई किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी और अब फसल बर्बाद होने के कारण उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा गन्ना और अन्य नकदी फसलों को भी काफी नुकसान पहुंचा है, जिससे आने वाले समय में किसानों की आय पर भी असर पड़ेगा।मौके पर पहुंचे प्रतिनिधि ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनके साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और हर प्रभावित किसान को उचित मुआवजा दिलाया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जल्द से जल्द नहर की मरम्मत कराई जाए और पानी की निकासी की उचित व्यवस्था की जाए, जिससे आगे और नुकसान न हो।
इस घटना के बाद क्षेत्र में सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। किसानों और ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नहरों की नियमित जांच और समय पर मरम्मत सुनिश्चित की जाए, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। फिलहाल प्रभावित किसान प्रशासन से राहत और मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं।















