राजस्थान: थानागाजी के भागडोती गांव में प्रस्तावित डंपिंग प्वाइंट व एफएसटीपी का ग्रामीणों ने किया विरोध, परियोजना हटाने की मांग

अलवर जिले की नगरपालिका थानागाजी क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम भागडोती की बजारी बस्ती, वार्ड नंबर-1 में प्रस्तावित डंपिंग प्वाइंट एवं एफएसटीपी (फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। इसको लेकर ग्राम भागडोती सहित आसपास के नोधावान क्षेत्र के बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर परियोजना को आबादी क्षेत्र से हटाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह प्रस्तावित स्थल पूरी तरह अनुपयुक्त है और इससे क्षेत्र के पर्यावरण, स्वास्थ्य और सामाजिक संरचना पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि प्रस्तावित डंपिंग प्वाइंट एवं एफएसटीपी स्थल आबादी क्षेत्र और शिक्षा केंद्र से मात्र 50 से 60 मीटर की दूरी पर स्थित है। इस शिक्षा केंद्र में वर्षों से बच्चों की पढ़ाई हो रही है। यदि यहां कचरा डंपिंग और मल-शोधन संयंत्र स्थापित किया जाता है, तो दुर्गंध, संक्रमण और प्रदूषण के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि भविष्य में बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ जाएगा।

ग्रामीणों ने यह भी चिंता जताई कि क्षेत्र में पीएचईडी द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से पेयजल व्यवस्था विकसित की गई है। डंपिंग प्वाइंट और एफएसटीपी के कारण भूजल और पेयजल स्रोतों के दूषित होने की प्रबल संभावना है, जिससे आसपास के गांवों की जलापूर्ति प्रभावित हो सकती है। यह स्थिति ग्रामीणों के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकती है।इसके अलावा प्रस्तावित स्थल नदी, प्राकृतिक जल स्रोतों और एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल के बेहद समीप बताया गया है। इस धार्मिक स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। ऐसे में कचरा डंपिंग और एफएसटीपी स्थापित होने से न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचेगी, बल्कि क्षेत्र की पवित्रता और सामाजिक माहौल भी प्रभावित होगा।

ग्रामीणों ने यह भी उल्लेख किया कि यह क्षेत्र ईएसजेड (इको-सेंसिटिव जोन) की सीमा में आता है, जहां वन्यजीवों की नियमित आवाजाही रहती है। डंपिंग प्वाइंट और एफएसटीपी से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना भी बढ़ सकती है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पर्यावरण, जनस्वास्थ्य, शिक्षा और धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित डंपिंग प्वाइंट एवं एफएसटीपी को किसी अन्य उपयुक्त और आबादी से दूर स्थान पर स्थापित किया जाए, ताकि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनी रह सके।

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