इंदौर में दूषित पानी मामला: सीएम मोहन यादव का बड़ा एक्शन, अपर आयुक्त हटाए गए, डीएम से जवाब तलब

मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बड़ा एक्शन लिया है. सीएम ने इंदौर के अपर आयुक्त को तत्काल हटाने का आदेश दिया है. साथ ही साथ सीएम ने प्रभारी अधीक्षण यंत्री से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस लेने को कहा हैं और डीएम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों के साथ इंदौर के दूषित पेयजल प्रकरण में राज्य शासन द्वारा की जा रही कार्रवाई की समीक्षा की. सीएम ने अपर मुख्य सचिव (नगरीय प्रशासन एवं विकास) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर भी चर्चा की. इंदौर नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को इस सम्बन्ध में कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश भी दिया. साथ ही इंदौर नगर निगम में आवश्यक पदों पर तत्काल प्रभाव से पूर्ति करने के निर्देश भी दिए हैं.

निगम प्रशासन की बड़े स्तर पर लापरवाही

जांच में पता चला है कि दूषित पानी का सप्लाई केवल भागीरतपुरा में ही नहीं हुआ बल्कि शहर के 59 स्थानों पर सप्लाई का पानी पीने योग्य नहीं मिला है. यह जानकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट से सामने आई है.बोर्ड ने नगर निगम को तीन बार पत्र लिखकर दूषित पानी को लेकर चेताया था और इन इलाकों में उपचार के बाद ही पानी की आपूर्ति करने की बात कही ही.

60 में से 59 सैंपल फेल मिले थे

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वर्ष 2016-17 और 2017-18 के दौरान शहर के 60 स्थानों से पानी के सैंपल लिए थे. इनकी जांच रिपोर्ट 2019 में आई, जिसमें 60 में से 59 सैंपल फेल पाए गए थे. जांच में पानी में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिला, जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है और उल्टी, दस्त, पेट दर्द जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.

इन इलाकों में सप्लाई का पानी पीने योग्य नहीं

जिन इलाकों में पानी पीने योग्य नहीं मिला, उनमें भागीरथपुरा, खातीपुरा, रामनगर, नाहर शाहवली रोड, खजराना, गोविंद कॉलोनी, शंकर बाग कॉलोनी, परदेशीपुरा, सदर बाजार, राजवाड़ा, जूनी इंदौर सहित कई घनी आबादी वाले क्षेत्र शामिल हैं. शहर के जिन स्थानों से सैंपल लिए गए थे, उनमें से अधिकांश में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाया गया था और इसकी जानकारी नगर निगम को समय-समय पर दी गई.

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