राजगढ़ (अलवर) में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना की मांग को लेकर राजगढ़ आवाज मंच के बैनर तले चल रहा अनशन अब जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। कस्बे के गोल सर्किल पर चल रहे इस अनशन स्थल पर बुधवार को सैकड़ों की संख्या में कस्बेवासी मौजूद रहे। सुबह से ही अनशन स्थल पर लोगों का आना-जाना लगा रहा और माहौल पूरी तरह से आंदोलनमय नजर आया।
अनशन स्थल पर मीणावटी लोकगीतों का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक गीतों के माध्यम से शिक्षा के अधिकार और क्षेत्र के विकास की आवाज बुलंद की। लोकगीतों ने न केवल आंदोलनकारियों में जोश भरा, बल्कि वहां मौजूद आम लोगों को भी भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, बच्चों के भविष्य और राजगढ़ क्षेत्र में केंद्रीय विद्यालय की आवश्यकता को लेकर लगातार चर्चा होती रही।
इस आंदोलन में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, व्यापारी वर्ग और आम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। व्यापारियों ने अनशन स्थल पर पहुंचकर आंदोलनकारियों को समर्थन दिया और कहा कि केंद्रीय विद्यालय खुलने से न केवल शिक्षा का स्तर सुधरेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र का विकास भी होगा। कई सामाजिक संगठनों ने मंच से संबोधित करते हुए सरकार से राजगढ़ की वर्षों पुरानी मांग को जल्द पूरा करने की अपील की।
अनशन स्थल पर भोजन प्रसादी का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की। कस्बेवासियों ने अपने स्तर पर सहयोग करते हुए पानी, फल और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन और शांति बनाए रखी गई, जिससे आंदोलन का सकारात्मक संदेश बाहर तक पहुंचा।
स्वास्थ्य की दृष्टि से भी प्रशासन सतर्क नजर आया। समय-समय पर मेडिकल टीम अनशन पर बैठे आंदोलनकारियों की जांच करती रही। रक्तचाप, शुगर और अन्य जरूरी स्वास्थ्य परीक्षण किए गए, ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके। मेडिकल टीम की मौजूदगी से आंदोलनकारियों और उनके परिजनों को भी संतोष मिला।
आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक राजगढ़ में केंद्रीय विद्यालय की स्वीकृति नहीं मिलती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के बच्चों के भविष्य से जुड़ी है। कस्बेवासियों की बढ़ती भागीदारी से यह साफ हो गया है कि राजगढ़ में केंद्रीय विद्यालय की मांग अब और मजबूत हो चुकी है।















