भारत-गुयाना संबंधों को मजबूत करने में मोदी का दौरा, गिरमिटिया मजदूरों का ऐतिहासिक योगदान

गुयाना, जो दक्षिण अमेरिका का एक छोटा सा देश है, भारतीय मूल के लोगों के लिए एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्त्व रखता है। यहां की लगभग 40% आबादी भारतीय मूल की है, जिनके पूर्वज 19वीं सदी में गिरमिटिया मजदूरों के रूप में यहां आए थे। यह मजदूर ब्रिटिश साम्राज्य के तहत गन्ने की खेती के लिए गुयाना और अन्य देशों में लाए गए थे। 1834 में ब्रिटेन में गुलामी प्रथा के खत्म होने के बाद, गुयाना में कामकाजी हाथों की आवश्यकता बढ़ गई, और इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए भारतीयों को यहां लाया गया। 1838 से 1917 तक करीब 2 लाख भारतीय गिरमिटिया मजदूरों के रूप में गुयाना पहुंचे।

गुयाना की आजादी के बाद, ये मजदूर और उनके वंशज देश के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने का अहम हिस्सा बने। यहां दिवाली, होली और अन्य भारतीय त्योहारों का उल्लास देखने को मिलता है।

हाल के वर्षों में, गुयाना ने अपनी अर्थव्यवस्था में जबरदस्त बदलाव देखा है। 2015 में तेल के भंडार की खोज के बाद, देश की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ और यह अब दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। 2023 में देश की अर्थव्यवस्था ने 62.3% की वृद्धि दर हासिल की।

भारत ने कोविड महामारी के दौरान भी गुयाना की मदद की, जब उसने गुयाना को कोविशील्ड वैक्सीन की 80,000 खुराकें भेजी और स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने के लिए 1 मिलियन डॉलर का योगदान किया।

गुयाना का यह भारतीय कनेक्शन भारत और गुयाना के बीच संबंधों को और प्रगाढ़ करता है, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आगामी दौरा इस रिश्ते को और भी मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

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