एक ही जाति के थे 86 में से 56 SDM’, योगी सरकार में मेरिट और कैलेंडर से बदली पूरी तस्वीर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर विपक्षी दल, विशेषकर समाजवादी पार्टी, एक बार फिर युवाओं के बीच भ्रम फैलाने की रणनीति पर काम कर रही है। प्रयागराज में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) के सामने चल रहे छात्र आंदोलन की आड़ में राजनीतिक रोटियां सेंकने का प्रयास किया जा रहा है।हालांकि, छात्रों की मांगों के बीच यह विश्लेषण करना अनिवार्य है कि पिछले 8.5 वर्षों में उत्तर प्रदेश की भर्ती व्यवस्था ने ‘भाई-भतीजावाद’ से ‘पारदर्शिता’ तक का सफर कैसे तय किया।जब हम वर्तमान व्यवस्था की तुलना 2012-2017 के अखिलेश यादव सरकार से करते हैं, तो फर्क साफ नजर आता है। सपा कार्यकाल में भर्ती परीक्षाएं अनियमितताओं और ‘नकल माफिया’ के संरक्षण का पर्याय बन चुकी थीं, जिसकी गंभीरता को देखते हुए बाद में योगी सरकार ने कई मामलों की जांच CBI को सौंपी।

भाई-भतीजावाद और जातिगत पक्षपात का दौर

सपा सरकार के दौरान नियुक्तियों में मेरिट को दरकिनार कर खास विचारधारा और जाति को वरीयता देने के आरोप जगजाहिर थे।

  • विवादास्पद चयन: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने उस दौर में एक डेटा साझा करते हुए सवाल उठाए थे कि 86 चयनित SDM में से 56 एक ही विशेष जाति से कैसे हो सकते हैं? इसने UPPSC की विश्वसनीयता पर गहरा दाग लगाया था।
  • असंवैधानिक नियुक्तियां: इलाहाबाद हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने UPPSC चेयरमैन अनिल यादव की नियुक्ति को ‘राजनीतिक भाई-भतीजावाद’ बताते हुए रद्द कर दिया था।

CBI जांच के दायरे में रही सपा सरकार की भर्तियां

भ्रष्टाचार इस कदर व्याप्त था कि PCS-2015 और APS-2010 जैसी बड़ी भर्तियों में धांधली की पुष्टि हुई। CBI ने FIR दर्ज कर माना कि मॉडरेशन और इंटरव्यू प्रक्रिया में हेरफेर कर अपात्रों को लाभ पहुंचाया गया। सॉल्वर गैंग्स के सक्रिय होने और पुलिस कांस्टेबल भर्ती में भारी गड़बड़ियों के कारण युवाओं का भरोसा व्यवस्था से पूरी तरह उठ चुका था।

योगी सरकार: पारदर्शिता और महिला सशक्तिकरण का नया युग

2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले भर्ती कैलेंडर की व्यवस्था लागू की, ताकि परीक्षाएं समयबद्ध हो सकें।

  • रिकॉर्ड नियुक्तियां: पिछले 8.5 वर्षों में उत्तर प्रदेश सरकार ने साढ़े आठ लाख से ज्यादा नौकरियां प्रदान की हैं। अकेले पुलिस विभाग में 2.19 लाख कार्मिकों की भर्ती हुई है।
  • आधी आबादी का सम्मान: पुलिस भर्ती में 20 प्रतिशत महिला आरक्षण सुनिश्चित कर 44 हजार से अधिक महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई, जो महिला सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार: खपरैल के कमरों से निकालकर पुलिसकर्मियों के लिए हाईटेक मल्टी-स्टोरी फ्लैट्स का निर्माण योगी सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है।

सुधार की गुंजाइश बनाम अराजकता का इतिहास

इसमें संदेह नहीं कि किसी भी बड़ी व्यवस्था में सुधार की सतत प्रक्रिया चलती रहती है और योगी सरकार छात्रों की जायज मांगों पर त्वरित कार्रवाई के लिए जानी जाती है। लेकिन, प्रयागराज में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच युवाओं को यह जरूर याद रखना चाहिए कि एक दौर वह था जब नियुक्तियों में ‘पर्ची और खर्ची’ का बोलबाला था। वर्तमान सरकार की पारदर्शिता की तुलना पूर्ववर्ती सरकार की ‘अराजकता’ से करने पर तस्वीर खुद-ब-खुद साफ हो जाती है।

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