इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट जैसे प्रोफेशनल कोर्स कर विदेश में अपना कॅरिअर बनाने की चाह रखने वालों के लिए अब अमेरिका जाना दूर की कौड़ी हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एच1-बी वीजा के लिए एक लाख डॉलर बतौर फीस चुकाने के एलान के बाद ऐसे युवाओं के सपने पूरे होने से पहले ही टूटने लगे हैं।कारण, पढ़ाई के बाद नौकरी के लिए अमेरिका जाने वाले युवाओं को वीजा के लिए करीब 90 लाख रुपये से ज्यादा चुकाने पड़ेंगे। पहले वीजा के लिए तीन से पांच लाख रुपये तक खर्च करने होते थे लेकिन अब नौकरी करने से पहले ही इस बड़ी राशि को जमा करने की शर्त उनकी राह में बड़ा रोड़ा बन गई है। युवाओं ने केंद्र सरकार से मांग करनी शुरू कर दी है कि वह इस मामले में मध्यस्थता करे ताकि भारतीय युवा अपनी काबिलियत का डंका दुनिया में बजा सकें।
सत्या नडेला जैसे बनना होगा मुश्किल
कमला नगर निवासी अग्रिम अग्रवाल ने बताया कि माइक्रोसाॅफ्ट के सीईओ सत्या नडेला की तरह मैं भी मनीपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से पढ़ाई कर अमेरिका में एमटेक कर वहीं से अपने कॅरिअर को शुरू करना चाहता था। अब अगर इतनी भारी रकम जमा करने की शर्त रहेगी तो शुरुआती दौर में युवा यह रकम कैसे चुकाएंगे। जाहिर है उन्हें वहां जाने से पहले सोचना पड़ेगा।
दूसरे देशों का रुख करेंगे युवा
सिकंदरा निवासी अभिमन्यु सोलंकी का कहना है कि आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद अमेरिकी यूनिवर्सिटी में आगे की पढ़ाई कर नौकरी करने का प्लान था। पर मिडिल क्लास के लिए इतनी बड़ी राशि को जबरदस्ती सिर्फ वीजा के नाम पर मांगी जाएगी तो जाहिर है कि लोग दूसरे देशों का रुख करेंगे जो काबिलियत की कद्र करते हैं।
अमेरिका में रह रहे भारतीय भी चिंतित
अमेरिकी राष्ट्रपति के इस फैसले से वहां रह रहे भारतीय युवा भी चिंतित हैं। एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर रहीं शहर के पार्श्वनाथ पंचवटी की रहने वाली श्वेता गुप्ता कहती हैं कि फिलहाल इस फैसले से पहली बार अमेरिका आने की चाह रखने वाले युवाओं को परेशानी होगी। जो युवा नौकरी कर रहे हैं, वह अगर नौकरी छोड़कर भारत जाएंगे और फिर अमेरिका लौटना चाहेंगे, तो उनपर यह नया नियम लागू होगा। हालांकि वह कहती हैं कि यह अमेरिका में अब भारत के वर्कफोर्स और टैलेंट पर निर्भरता बढ़ी है। ऐसे में संभव है कि अमेरिकी सरकार जल्द इस फैसले पर पुनर्विचार कर सकती है।















