ईरान में एथलीटों पर हो रही दमनकारी कार्रवाई ने खेल जगत को झकझोर कर रख दिया है। हाल ही में एक 19 साल के पहलवान सालेह मोहम्मदी को फांसी दिए जाने के बाद अब जेलों में बंद अन्य खिलाड़ियों की सुरक्षा और उनके भविष्य को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंताएं और गहरी हो गई हैं।
पहलवान सालेह मोहम्मदी की फांसी और विवाद
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक विजेता पहलवान सालेह मोहम्मदी को गुरुवार को दो पुलिस अधिकारियों की हत्या के आरोप में फांसी दे दी गई। मोहम्मदी ने अदालत में इन आरोपों को सिरे से खारिज किया था और दावा किया था कि उनका कबूलनामा यातना देकर लिया गया था। सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयानों को भी कथित तौर पर नजरअंदाज किया गया। यह मामला 2018 के विरोध प्रदर्शनों के बाद फांसी पर चढ़ाए गए पहलवान नवीद अफकारी की याद दिलाता है, जो ईरान में एथलीटों के दमन का प्रतीक बन गए थे।
सलाखों के पीछे ईरान का खेल जगत
ईरान की जेलों में वर्तमान में कई नामी एथलीट, कोच और रेफरी बंद हैं। इनमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
- फुटबॉलर: मोहम्मद हुसैन हुसैनी और आमिर रज़ा नस्र आजादानी।
- मुक्केबाज: मोहम्मद जवाद वफाए सानी और मोहम्मद महशारी (एशियाई युवा कांस्य पदक विजेता)।
- अन्य: वाटर पोलो गोलकीपर अली पिशेवरजादेह, मैराथन धावक नीलोफर पास, और बास्केटबॉल कोच पयाम वाहिदी।
अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति से गुहार
ईरान के भीतर और बाहर के 200 से अधिक एथलीटों ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति को पत्र लिखकर कड़े कदम उठाने की मांग की है। उनका तर्क है कि ईरानी खेल संघ सीधे तौर पर सुरक्षा तंत्र से जुड़े हुए हैं, जो एथलीटों के मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं। मोहम्मदी की फांसी के बाद अब यह डर और बढ़ गया है कि जेल में बंद अन्य खिलाड़ियों के मामलों को भी बिना निष्पक्ष सुनवाई के जल्दबाजी में निपटाया जा सकता है।















