केरल के वायनाड में भूस्खलन के कारण 158 लोगों की मौत हो गई है और ये आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। वायनाड में आए भूस्खलन का मुद्दा बुधवार को राज्यसभा में भी उठा, जहां इस पर चर्चा हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में जवाब देते हुए सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी दी और साथ ही केरल सरकार पर भी हमला बोला।अमित शाह ने बताया कि केंद्र सरकार ने 23 जुलाई को ही राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की 9 टीमें केरल भेज दी थीं। उन्होंने सवाल उठाया कि केरल सरकार ने लोगों को शिफ्ट करने के लिए क्या कदम उठाए। अमित शाह ने कहा, “23 तारीख को ही NDRF की 9 टीम केरल भेजी गई थी। केरल सरकार ने क्या किया था? लोगों को शिफ्ट किया गया क्या? अगर शिफ्ट किया गया तो मरे कैसे?”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में अर्ली वॉर्निंग सिस्टम उपलब्ध है, जो 7 दिन पहले ही भूस्खलन का अनुमान लगा लेता है। विश्व में केवल 4 देशों के पास ऐसा सिस्टम है, और भारत उनमें से एक है।अमित शाह ने कहा कि SDRF में 10 फीसदी राशि कोई भी राज्य अपने हिसाब से इश्यू कर सकता है. आपदा के नाम पर 10 फीसदी खर्च करें तो कोई नहीं पूछता, लेकिन 90 फीसदी खर्च गाइडलाइंस के हिसाब से करना पड़ता है.
200 से ज्यादा लोग लापता
केरल के वायनाड जिले में भूस्खलन की घटनाओं से 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं. बचावकर्मी मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटे हैं, जिससे मृतक संख्या और बढ़ने की आशंका है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को बताया कि भूस्खलन के बाद मुंडक्कई और चूरलमाला इलाकों में 180 से अधिक लोग लापता हैं और 300 से ज्यादा मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं.
सेना, नौसेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के बचाव दल मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रहे हैं. भूस्खलन की घटनाएं मंगलवार को तड़के दो बजे से चार बजे के बीच हुईं, जिससे अपने घरों में सो रहे लोगों को बचने का मौका नहीं मिल पाया. वायनाड जिला प्रशासन की ओर से मंगलवार देर रात जारी आंकड़ों के अनुसार, नीलमबुर और मेप्पडी से करीब 30 मानव अंग भी बरामद किए गए हैं.
वायनाड उत्तरी केरल का एक पहाड़ी जिला है, जो अपने हरे-भरे जंगलों, सुंदर वादियों और मनोरम झरनों के लिए जाना जाता है. 2011 की जनगणना के अनुसार, जिले की कुल आबादी लगभग 8,17,000 है. लगातार जारी मूसलाधार बारिश के कारण मंगलवार तड़के वायनाड के मुंडक्कई, चूरलमाला, अट्टामाला और नूलपुझा सहित अन्य गांवों में बड़े पैमाने पर भूस्खलन की घटनाएं हुई थीं.















