सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली के पीजी की हकीकत एक बार फिर सामने ला दी है। हादसे के बाद दैनिक जागरण की टीम ने राजधानी के विभिन्न इलाकों में पीजी की पड़ताल की, जिसमें पाया कि ज्यादातर जगहों पर विद्यार्थी डब्बेनुमा कमरों में रहने को मजबूर हैं।सत्य निकेतन या मुखर्जी नगर ही नहीं कमला नगर, विजय नगर, हडसन लेन और जीटीबी नगर जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में पीजी संचालित हैं। इनमें कहीं कमरे के भीतर किचन सिमटा मिला, तो कहीं दर्जनों छात्रों के लिए आने-जाने को महज दो से तीन फीट का रास्ता दिखा अग्निशामक यंत्र और आपातकालीन निकासी की व्यवस्था भी नहीं दिखी। नियमों को ताक कर रखकर पांच से छह मंजिला इमारतों में भी पीजी चलाए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि मोटा किराया वसूलने वाले इन पीजी में छात्रों की सुरक्षा आखिर कितनी पुख्ता है।
जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर
सत्य निकेतन के कई पीजी में मुख्य प्रवेश द्वार और सीढ़ियों तक बमुश्किल ढाई फीट का रास्ता है। प्रवेश द्वार के पास कई मीटर लगे हैं जिनमें अगर हल्की सी भी चिंगारी सुलगती है तो आने-जाने का रास्ता बंद हो जाएगा। लैंटर और दीवारों पर मोटी दरारें पडी हैं और कई जगहों पर सीलन के साथ पानी टपकता दिखा।बैकलेन पर फ्लैट्स बिल्कुल सटा कर बनाए हुए हैं, ऐसे में कोई हादसा हुआ तो पिछले रास्ते से भी बचाव कार्य संभव नहीं होगा। छोटे-छोटे कमरों के लिए 15 से 30 हजार तक किराया चुकाने के बाद भी छात्र जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं।उधर, जीटीबी नगर स्थित हडसन लेन में छात्रों के लिए संचालित कई पीजी नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे हैं।कहीं पीजी संचालकों के पास संचालन की अनुमति नहीं है, तो कहीं अग्निशमन विभाग की अनापत्ति प्रमाणपत्र (फायर एनओसी) उपलब्ध नहीं मिली। 20 से 25 हजार रुपये वसूलकर भी पीजी आवासीय नियमों की अनदेखी कर संचालित किए जा रहे हैं।
जर्जर इमारतों और झूलते तारों से चिंता
शकरपुर और लक्ष्मी नगर रिहायशी इलाकों में 80 से 100 गज के मकान में संचालित पीजी के कारण छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ये क्षेत्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों का बड़ा हब हैं, जिसके चलते छोटी-छोटी जगहों पर बड़ी संख्या में छात्रों को ठहराया जा रहा है।कई पीजी जर्जर इमारतों में चल रहे हैं और बिजली की ओवरलोडिंग और झूलते तार शार्ट सर्किट का खतरा बढ़ा रहे हैं। कई जगह अग्निशमन यंत्र, पर्याप्त निकास और फायर एनओसी की व्यवस्था नहीं है और कई जगह बेसमेंट के बिना अनुमति इस्तेमाल किया जा रहा है।बाहरी दिल्ली की रिहायशी कालोनियों में पीजी संचालित हैं जहां विद्यार्थी व नौकरीपेशा लोग रहते हैं। ज्यादातर जगहों पर आपात स्थिति में निकलने का कोई रास्ता नहीं है। वहीं पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी, विकासपुरी, उत्तम नगर व आसपास के इलाके में पीजी हैं, जो रिहायशी कालोनियों में चल रहे हैं।
इन जगहों पर संचालित हैं ज्यादातर पीजी
सत्य निकेतन, कालू सराय, बेग सराय, मुखर्जी नगर, लक्ष्मी नगर, हडसन लेन, कोटला, लाजपत नगर, मालवीय नगर, मुनीरका, रूप नगर, शक्ति नगर, कमला नगर, जीटीबी नगर, किंग्सवे कैंप, मौरिस नगर, लक्ष्मी नगर, प्रीत विहार, मयूर विहार, राजेंद्र नगर, करोल बाग, नेब सराय, पटेल नगर।
ये दिखीं खामियां
- आने-जाने के लिए संकरे रास्ते।
- जर्जर भवनों में सीलन, दरारें और टपकता पानी।
- बैकलेन पर अतिक्रमण और पक्का निर्माण।
- छोटे कमरों के भीतर चल रहे किचन।
- बेसमेंट में चल रही गतिविधियां।
- बिजली की ओवरलोडिंग और झूलते तार।
- कोई आपात निकासी या आग बुझाने के यंत्र नहीं।
- कई जगह एनओसी नहीं।
आंकड़े
- 10 से 40 हजार तक वसूले जा रहे पीजी-फ्लैट में
- 2 से 4 छात्र रह रहे एक कमरे में
- 2 से 3 फीट तक दिखे रास्ते
- 6 मंजिल तक दिखे निर्माण






















































