मुजफ्फरनगर में राष्ट्रीय लोक अदालत में 4.41 लाख प्रकरण निस्तारित.

मुजफ्फरनगर। न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। शुभारंभ प्रभारी जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गरिमा सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में आपसी समझौते के आधार पर मामलों का निस्तारण होने से हार-जीत का प्रश्न नहीं रहता और पक्षकारों के बीच सौहार्द बना रहता है। साथ ही समय और धन की बचत होती है। लोक अदालत का उद्देश्य सरल, सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है।

उन्होंने बैंक अधिकारियों को ऋण संबंधी मामलों में ग्राहकों को अधिकतम संभव छूट देते हुए प्रकरणों का निस्तारण करने के निर्देश दिए। प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय खलीकुज्जमा ने पारिवारिक विवादों को सुलह-समझौते से निपटाने पर जोर दिया। परिवार न्यायालयों ने 125 मामलों का निस्तारण किया।

लोक अदालत के नोडल अधिकारी अपर जिला जज रवि कुमार दिवाकर ने इसे विवादों के समाधान और त्वरित न्याय का प्रभावी माध्यम बताया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डॉ. सत्येन्द्र कुमार चौधरी ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 4,41,556 प्रकरणों का निस्तारण किया गया।मोटर दुर्घटना दावा प्राधिकरण ने 107 मामलों में 9.45 करोड़ रुपये से अधिक का प्रतिकर दिलाया। जनपद न्यायालयों ने 5,630 शमनीय फौजदारी और 34 दीवानी मामलों का निस्तारण किया। फौजदारी मामलों में 12.59 लाख रुपये अर्थदंड वसूला गया, जबकि दीवानी मामलों में 19.07 लाख रुपये का अनुतोष प्रदान किया गया।

एनआई एक्ट की अदालत ने 39 मामलों में 1.17 करोड़ रुपये तथा स्थायी लोक अदालत ने 12 मामलों में 43.50 लाख रुपये का निस्तारण किया। राजस्व अधिकारियों ने 13,030 मामलों का निस्तारण कर 69.37 लाख रुपये राजस्व वसूला। विभिन्न बैंकों ने 352 ऋण मामलों में करीब 5.67 करोड़ रुपये का सेटलमेंट कराया।

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