हेल्दी लाइफ के लिए मजबूत हड्डियों और नसों का ठीक रहना बहुत जरूरी है. कुछ लोग कम उम्र में ही पीठ दर्द, घुटने दर्द और थकान से परेशान होने लगते हैं, जबकि दूसरे उम्र होने पर पतले नजर आते हैं. इसकी अहम वजह हड्डियों और नसों का कमजोर होना है. कैल्शियम की कमी से शरीर की हड्डियों का ढांचा कमजोर हो जाता है. अगर ध्यान न दिया जाए तो जरा सा गिरने पर ही बोन्स टूटने लगती हैं. इसे मेडिकली ऑस्टियोपोरोसिस कहा जाता है. इसके अलावा नसों के कमजोर होने से कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं.आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान दोनों ही इस बात पर जोर देते हैं कि कैल्शियम की कमी कई समस्याओं का मुख्य कारण है. हालांकि, आयुर्वेदिक विशेषज्ञ कहते हैं कि एक विशेष आहार योजना न केवल नसों की कमजोरी को कुछ हद तक कम कर सकती है, बल्कि हड्डियों को भी मजबूत कर सकती है.
कैल्शयम की कमी के कारण और लक्षण
कैल्शियम की कमी के लक्षणों में हड्डियों का जरा से गिरने पर टूट जाना, हथेलियों और तलवों में दर्द, ऐंठन और रात में पसीना आना शामिल हैं. बच्चों में लंबाई का कम बढ़ना और दांतों का सड़ना भी कैल्शियम की कमी के कारण होता है. जब शरीर को सहारा और मजबूती देने वाली हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, तो व्यक्ति परमानेंट झुकने की समस्या हो जाती है. उसकी फुर्ती कम हो जाती है और लंबाई घटने लगती है. उम्र बढ़ने के साथ-साथ हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस हो जाता है.सावधानी न बरतने पर अचानक फ्रैक्चर हो सकता है. कमर की रीढ़ की हड्डियों में कैल्शियम की कमी के कारण वे नरम हो जाती हैं, जिससे लंबाई कम हो जाती है और गिरने का खतरा बढ़ जाता है.
कैल्शियम के इंटेक के लिए खाएं ये चीजें
फूड एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप इन खाने की चीजों का नियमित रूप से सेवन करते हैं, तो अपने आप में बदलाव देखना शुरू कर देंगे.
हरी सब्जियां: कई हरी सब्जियां कैल्शियम से भरपूर होती हैं और यहां तक कि जिन्हें हरी सब्जियां पसंद नहीं हैं, उन्हें भी इन्हें खाने की आदत डालनी चाहिए. ये स्वास्थ्य का एक बेहतरीन स्रोत हैं.
दूध और डेयरी उत्पाद: दूध कैल्शियम का एक बेहतरीन स्रोत है. दूध, दही और पनीर को अपने दैनिक आहार में शामिल करना चाहिए.
तिल: तिल और गुड़ मिलाकर बने लड्डू खाने से कैल्शियम और आयरन दोनों मिलते हैं. ताड़ के गुड़ का इस्तेमाल करना बेहतर है.
रागी: रागी जावा, रागी इडली, रागी डोसा, रागी मुड्डा कैल्शियम प्रदान करते हैं. रायलसीमा क्षेत्रों में रागी के अधिक सेवन के कारण वहां के लोग हृष्ट-पुष्ट होते हैं.
मछली: छोटी मछलियां, विशेषकर रीढ़ वाली मछलियां, कैल्शियम का एक बेहतरीन स्रोत हैं. उदाहरण के लिए, छोटी मछलियां.
चिकन-मटन का सूप: मांसाहारी लोग बकरी और भेड़ के मांस का सूप पीकर अस्थि मज्जा से कैल्शियम प्राप्त कर सकते हैं.
सोया प्रोडक्ट्स: सोयाबीन, टोफू (सोया पनीर) और सोया दूध प्राकृतिक फाइटोएस्ट्रोजेन प्रदान करते हैं. ये एस्ट्रोजन की कमी को रोकते हैं और हड्डियों के क्षरण को कम करते हैं. इसके अलावा, ये एस्ट्रोजन की कमी से होने वाली कई समस्याओं जैसे सिरदर्द, चकत्ते, चिड़चिड़ापन और जोड़ों के दर्द को नियंत्रित कर सकते हैं. सोया दूध घर पर बनाया जा सकता है. आप भीगे हुए सोयाबीन को मिलाकर उसमें हल्दी, मिर्च पाउडर, दालचीनी पाउडर, शहद या सूखे खजूर का पाउडर मिला सकते हैं.सप्ताह में एक बार इनका सेवन करने से शरीर को ऊर्जा मिलती है और दिन भर एनर्जेटिक फील होता है. आयुर्वेद कहता है कि शरीर तभी मजबूत और स्वस्थ होगा जब हड्डियों में मौजूद खनिज मजबूत हों.















