बांग्लादेश की सरकार मोहम्मद यूनुस की एनजीओ ग्रामीण वेलफेयर से 666 करोड़ टका (करीब 5 अरब रुपए) की वसूली करेगी. एक अदालत ने आयकर चोरी मामले में यह फैसला सुनाया है. कोर्ट फैसले के मुताबिक ग्रामीण वेलफेयर पर जो आरोप लगाए गए थे, वो सच पाए गए हैं. ऐसे में ग्राम कल्याण के खाते से 666 करोड़ टका की वसूली सरकार कर सकती है. वहीं ग्रामीण वेलफेयर एनजीओ ने अदालत के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की बात कही है.स्थानीय मीडिया के मुताबिक बांग्लादेश हाई कोर्ट के जज मोहम्मद मुजीबुर रहमान मियां ने अपने फैसले में कहा कि 2017 से यूनुस की एनजीओ राजस्व जमा नहीं करा रही है, जो नियमों के विरुद्ध है. कोर्ट ने वसूली के लिए 30 दिन का वक्त दिया है.
यूनुस के NGO पर क्यों हुई कार्रवाई?
2004 में मोहम्मद यूनुस ने अपने एक अन्य एनजीओ ग्रामीण टेलिकॉम के पैसे को ग्रामीण वेलफेयर में ट्रांसफर करा दिया. ताकि इस संगठन में बाहर के निवेश को लाया जा सके. यहीं पर बांग्लादेश की आयकर एजेंसी एक्टिव हो गई. एजेंसी का कहना कि पैसे को ट्रांसफर करने के बाद ग्रामीण वेलफेयर ने सरकार को टैक्स नहीं दिया, जिसके बाद पहले कंपनी पर 550 करोड़ टका का टैक्स लगाया गया. अब यह रकम बढ़कर 666 करोड़ टका हो गई है.
1996 में इसे यूनुस ने स्थापित किया था
मोहम्मद यूनुस जब अर्थव्यवस्था को लेकर काम कर रहे थे, तब उन्होंने बांग्लादेश में इस एनजीओ का गठन किया था. शेख हसीना की सरकार में इस एनजीओ को बांग्लादेश की सरकार से खूब मदद मिली. 2024 में शेख हसीना के जाने के बाद इस एनजीओ के खिलाफ केस दर्ज हो गया.अब 10 सितंबर को हाई कोर्ट से फैसला सुनाया गया है. बांग्लादेश में ग्रामीण वेलफेयर नामक एनजीओ हेल्थ सेक्टर में काम करती है. संगठन के देशभर में लगभग 150 स्वास्थ्य केंद्र हैं.
यूनुस को पहला बड़ा झटका लगा है
2024 में शेख हसीना के जाने के बाद मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाया गया था. यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश में आम चुनाव कराए गए, जिसमें तारिक रहमान की पार्टी की जीत हुई. तारिक रहमान प्रधानमंत्री बने. इसके बाद यूनुस साइडलाइन हो गए. पहले तारिक रहमान की सरकार ने यूनुस के लिए गए कई फैसले बदल दिए. अब यूनुस की एनजीओ पर कार्रवाई हुई है.























































