यूरोप को दुनिया के विकसित क्षेत्रों में गिना जाता है, लेकिन यहां के कई देशों में युवा और आम लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर परेशान हैं. कहीं स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, कहीं किराया इतना महंगा हो गया है कि घर लेना मुश्किल है, तो कहीं महंगाई और रोजगार की कमी लोगों के गुस्से की वजह बन रही है. फ्रांस, स्पेन, पुर्तगाल, इटली, बेल्जियम और अल्बानिया में विरोध-प्रदर्शनों के पीछे अलग-अलग कारण हैं, लेकिन इन सबमें एक बात समान है, लोग बेहतर जीवन, सस्ती सुविधाएं और सरकार से ठोस कार्रवाई चाहते हैं.
फ्रांस: स्कूल में लंबा दिन, फिर भी पढ़ाई में मुश्किलें
फ्रांस में विरोध-प्रदर्शन की शुरुआत हाईस्कूल के विद्यार्थियों ने की. उनकी शिकायतें स्कूलों में शिक्षकों की कमी, खराब इमारतों, लंबे समय तक चलने वाली कक्षाओं और विश्वविद्यालयों में दाखिले की जटिल प्रक्रिया से जुड़ी हैं. कुछ विद्यार्थियों को सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक स्कूल में रहना पड़ता है. टाइम टेबल में लंबे अंतराल होने के कारण भी उनका दिन खिंच जाता है.ले मोंडे की 16 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस के सरकारी स्कूलों में एक कक्षा में औसतन 30.5 विद्यार्थी हैं. शिक्षा मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, माध्यमिक शिक्षा में पूरे साल के करीब 10% पढ़ाई के घंटे नहीं हो पाते. इसकी वजहों में शिक्षकों की अनुपलब्धता और स्कूल बंद रहना शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, हाईस्कूल की इमारतें औसतन 65 साल और व्यावसायिक हाईस्कूल की इमारतें 71 साल पुरानी हैं. पिछले 10 साल में 15% से भी कम इमारतों का नवीनीकरण हुआ है.
शुरुआत में विद्यार्थियों की मांगें शिक्षा व्यवस्था तक सीमित थीं, लेकिन बाद में महंगाई से परेशान लोग और मजदूर संगठन भी प्रदर्शन से जुड़ गए. अमेरिका की बमबारी के कारण तेल की ढुलाई प्रभावित होने और ईंधन महंगा होने से आर्थिक दबाव का मुद्दा भी चर्चा में आया. फ्रांस के CGT मजदूर संगठन ने कीमतें घटाने, पेंशन बढ़ाने और बेहतर वेतन की मांग की. सरकार ने अतिरिक्त अस्थायी शिक्षकों की व्यवस्था करने और विश्वविद्यालय फीस बढ़ाने की योजना वापस लेने का वादा किया है.
स्पेन: एक बुजुर्ग महिला का मामला बना आवास संकट का प्रतीक
स्पेन में विरोध-प्रदर्शनों के केंद्र में घर और किराया है. एक निवेश फंड की ओर से किराया 230% बढ़ाए जाने के बाद 87 साल की एक महिला को घर खाली करना पड़ा. अस्पताल में भर्ती होने के दो हफ्ते बाद उनकी मौत हो गई. इस घटना ने महंगे किराये और बेदखली के खिलाफ चल रहे गुस्से को और बढ़ा दिया. हालांकि, इस घटना को आवास संकट से जोड़कर देखा जा रहा है.प्रदर्शनकारी किराये पर सीमा तय करने, बेदखली रोकने और निवेश फंडों की ओर से रिहायशी घर खरीदने पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं. स्पेन में आपातकालीन आवास बिल पास नहीं हो सका. ऐसे में आवास संकट राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, स्पेन में 29 नवंबर को चुनाव होने की संभावना भी इस बहस को अहम बनाती है.
पुर्तगाल: घर की कीमतें बढ़ीं, किराया वेतन से भी ज्यादा
पुर्तगाल में भी आवास संकट लोगों के गुस्से की बड़ी वजह है. राजधानी लिस्बन में औसत किराया, औसत वेतन के मुकाबले इतना ज्यादा है कि घर किराये पर लेने के बाद दूसरे खर्चों के लिए पैसे बचाना मुश्किल हो सकता है.यूरोपीय संसद के मुताबिक, 2015 से 2024 के बीच पुर्तगाल में घरों की कीमतें 124.4% बढ़ीं. वहीं, यूरोपीय संघ की परिषद के आवास संबंधी आंकड़ों में लिस्बन का अनुमानित किराया औसत वेतन का 116% बताया गया है. इसका अर्थ है कि औसत वेतन पाने वाले व्यक्ति के लिए अकेले अपनी कमाई से औसत किराया चुकाना भी मुश्किल हो सकता है.यहां प्रदर्शनकारी महंगे मकानों, कम वेतन और जीवनयापन की बढ़ती लागत के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. यह संकट केवल घर खरीदने वालों का नहीं, बल्कि किराये पर रहने वाले युवाओं और परिवारों का भी है.















